बाहर बढ़ते प्रदूषण और धूल-धुएं से बचाव के लिए लोग अक्सर घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद कर लेते हैं। लेकिन डॉक्टरों के अनुसार घर की बंद हवा में विषाक्त तत्वों का स्तर कई गुना बढ़ जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट बताती है कि घर के अंदर का प्रदूषण बाहर की तुलना में पांच गुना ज्यादा जहरीला हो सकता है। ऐसे में यह विश्वास कि घर की हवा सुरक्षित है, तेजी से भ्रम साबित हो रहा है।
‘टॉक्सिक ट्राएंगल’ क्या है और क्यों है इतना खतरनाक
एक इंस्टाग्राम रील में डॉक्टर ने घर के भीतर पनप रहे एक खतरनाक ‘लव ट्राएंगल’ का जिक्र किया, जिसे उन्होंने ‘टॉक्सिक ट्राएंगल’ कहा। यह तीन चीजों से मिलकर बनता है—रूम फ्रेशनर, खुशबूदार मोमबत्तियां और अगरबत्ती। ये तीनों चीजें जिन रसायनों का उत्सर्जन करती हैं, वे वाष्पशील कार्बनिक यौगिक यानी VOCs कहलाते हैं, जिनमें बेंजीन, फॉर्मलडिहाइड और टॉल्यूइन जैसे तत्व शामिल हैं। ये रसायन लंबे समय तक सांस के जरिए शरीर में जाकर फेफड़ों के कैंसर, श्वसन रोगों और हार्मोनल असंतुलन जैसे जोखिम बढ़ा देते हैं।
कमरे की हवा पर इन चीजों का वैज्ञानिक प्रभाव
रिसर्च में पाया गया है कि जब खुशबूदार मोमबत्तियां जलाई जाती हैं, तो कमरे का पीएम 2.5 स्तर कई गुना बढ़ जाता है। यह स्तर इतना खतरनाक होता है कि विशेषज्ञ इसे कई सिगरेट पीने के बराबर नुकसानदेह बताते हैं। रूम फ्रेशनर और अगरबत्तियां भी धीरे-धीरे ऐसे रसायनों का उत्सर्जन करती हैं, जो घर की हवा को प्रदूषित कर फेफड़ों और दिल पर भारी दबाव डालते हैं। बिना वेंटिलेशन वाले कमरों में ये प्रभाव और अधिक खतरनाक हो जाते हैं।
स्वास्थ्य पर बढ़ते खतरे और संभावित दीर्घकालिक प्रभाव
टॉक्सिक ट्राएंगल केवल तात्कालिक परेशानी जैसे सिरदर्द, एलर्जी या सांस में जलन ही नहीं बढ़ाता, बल्कि इसके लंबे समय तक संपर्क में रहने से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। लगातार इन रसायनों का असर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर और गंभीर रूप से पड़ता है। वैज्ञानिक तौर पर यह साबित है कि VOCs शरीर की कोशिकाओं पर कैंसरकारी प्रभाव डालते हैं और हार्मोनल डिसरप्शन की वजह से कई दीर्घकालिक समस्याओं को जन्म देते हैं।
इससे बचने के सरल लेकिन प्रभावी समाधान
एक्सपर्ट्स का कहना है कि घर की हवा को शुद्ध रखने के लिए सबसे पहले रासायनिक सुगंधित उत्पादों का प्रयोग सीमित करना चाहिए। केमिकल आधारित मोमबत्तियों की जगह बीजवैक्स या सोया वैक्स से बनी मोमबत्तियों का उपयोग किया जा सकता है, जो अपेक्षाकृत सुरक्षित होती हैं। जिन लोगों को एलर्जी नहीं होती, वे एसेंशियल ऑयल डिफ्यूजर का इस्तेमाल कर सकते हैं। सबसे सरल और प्राकृतिक उपाय है—घर की खिड़कियां खोलकर ताजी हवा को अंदर आने देना। उचित वेंटिलेशन हर तरह के indoor pollution को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
स्वस्थ जीवन के लिए घर की हवा पर ध्यान ज़रूरी
अगर हम घर को सुरक्षित जगह मानते हैं, तो उसकी हवा को भी सुरक्षित बनाना हमारी जिम्मेदारी है। यह समझना जरूरी है कि खुशबूदार माहौल हमेशा स्वस्थ माहौल नहीं होता। कमरे में पर्याप्त हवा का प्रवाह, प्राकृतिक विकल्पों का उपयोग और रासायनिक उत्पादों का सीमित इस्तेमाल हमारे स्वास्थ्य को कई गंभीर जोखिमों से बचा सकता है।
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