भोपाल। राजधानी भोपाल में रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों और सीलिंग की कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को करीब तीन घंटे सुनवाई हुई। कोर्ट ने सीलिंग में लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट रहवासी उपयोग वाली जगहों पर सीलिंग और डिमोलिशन की कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। इसी सुनवाई में 21 साल से अटके भोपाल के नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को जारी करने की मंजूरी भी मिल गई।
रहवासी इलाकों में कारोबार नहीं, सीलिंग रहेगी जारी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन जगहों का लैंड यूज स्पष्ट रूप से रहवासी है, वहां व्यावसायिक गतिविधियां नहीं होनी चाहिए। ऐसी जगहों पर सीलिंग और डिमोलिशन की कार्रवाई जारी रहेगी। हालांकि, जिन इलाकों में लैंड यूज स्पष्ट नहीं है या जहां मिक्स्ड लैंड यूज है, वहां कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने अधिकारियों को अपने निर्देशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए।
सील दुकानें शाम को खुलने की शिकायत
सुनवाई से पहले भोपाल के रहवासियों की करीब 10 शिकायतें एमिकस क्यूरी एके सिन्हा के जरिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। शिकायतों में कहा गया कि अगस्त में नगर निगम ने जिन प्रतिष्ठानों को सील किया था, उनमें से कुछ सुबह बंद रहते हैं, लेकिन शाम को दोबारा खुल जाते हैं। शिकायतों के बाद कोर्ट के सामने यह मुद्दा आया कि कागजों पर कार्रवाई के बावजूद कई जगह जमीन पर उसका असर दिखाई नहीं दे रहा है। इसी को लेकर सीलिंग की कार्रवाई में लापरवाही पर नाराजगी जताई गई।
अब नहीं बनेगी नई कमेटी
सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार की ओर से पेश केएन नटराजन ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि अब सीलिंग मामले में कोई नई कमेटी नहीं बनाई जाएगी और कार्रवाई में रुकावट नहीं डाली जाएगी। दरअसल, राज्य सरकार ने पहले सीलिंग से जुड़े मामले की जांच के लिए 10 सदस्यीय कमेटी बनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में इस कमेटी की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। कमेटी के गठन को लेकर अवमानना का मुद्दा भी उठा था। अब सरकार के आश्वासन के बाद नई कमेटी नहीं बनाने की बात सामने आई है। अवमानना की कार्रवाई होगी या नहीं, यह कोर्ट के लिखित आदेश से स्पष्ट होगा।
21 साल से अटका मास्टर प्लान अब आगे बढ़ेगा
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भोपाल के लिए 1995 के बाद नया मास्टर प्लान नहीं आया। 2005 में लागू किया गया मास्टर प्लान भी अपनी अवधि पूरी कर चुका है। इसके बावजूद शहर का विकास पुराने मास्टर प्लान के आधार पर किया जा रहा है। सरकार ने नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार होने की जानकारी देते हुए उसे जारी करने की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने ड्राफ्ट जारी करने की अनुमति दे दी। फाइनल प्रकाशन से पहले सरकार को इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को देनी होगी।
8,084 प्रतिष्ठानों को मिले थे नोटिस
सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के फैसले के बाद नगर निगम ने रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। निगम की सूची में करीब 62,500 दुकानें दर्ज थीं। इनमें से 8,084 प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए गए थे। इसके बाद करीब 190 दुकानों को तीन दिन के लिए बंद या सील किया गया था। कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने प्रदर्शन किया था।
विरोध के बाद 22 दिन रुकी रही सीलिंग
नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों के प्रदर्शन के बाद नगर निगम ने कार्रवाई रोक दी थी। मंगलवार की सुनवाई से पहले करीब 22 दिन से सीलिंग की कार्रवाई रुकी हुई थी। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने नगर निगम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई कार्रवाई रिपोर्ट पर भी आपत्ति जताई। उनके आरोप के मुताबिक, कुछ प्रतिष्ठानों को सील किए जाने के बाद वे दोबारा खुल गए।
अगस्त में 10 सदस्यीय कमेटी पर लगी थी रोक
अगस्त की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई 10 सदस्यीय जांच कमेटी की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ओर से दुकान संचालकों को दिए गए राहत और स्टे आदेश भी रद्द कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की सुनवाई पहले 15 सितंबर को होनी थी, लेकिन उस दिन सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद मंगलवार को करीब तीन घंटे सुनवाई हुई।
रहवासियों ने शोर, भीड़ और सुरक्षा का मुद्दा उठाया
रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्थानीय लोगों की शिकायतें शोर, भीड़ और सुरक्षा से जुड़ी हैं। रहवासियों का कहना है कि घरों के आसपास लगातार व्यावसायिक गतिविधियां होने से सार्वजनिक शांति प्रभावित होती है। उनका यह भी कहना है कि व्यावसायिक गतिविधियों से भीड़ और वाहनों की आवाजाही बढ़ती है, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों समेत स्थानीय लोगों के सामने ट्रैफिक और सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं।
23 नवंबर को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रहवासी उपयोग वाली जगहों पर कार्रवाई जारी रखने की बात कही है। वहीं भोपाल के नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को जारी करने की अनुमति भी मिल गई है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।