नई दिल्ली. देशभर में मानसून की सक्रियता ने एक बार फिर मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार गुरुवार को उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के अनेक राज्यों में तेज बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है। कई स्थानों पर 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जबकि कुछ इलाकों में अत्यधिक वर्षा होने का भी अनुमान है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल की खाड़ी से लगातार आ रही नमी और सक्रिय मानसूनी तंत्र के कारण आगामी दिनों में भी वर्षा का क्रम बना रह सकता है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम संबंधी परामर्शों का पालन करने की अपील की है।
दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश में तेज बारिश की संभावना
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उत्तर प्रदेश में मानसून ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है। मौसम विभाग ने दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद सहित पूरे एनसीआर क्षेत्र में दिनभर रुक-रुककर तेज बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, नोएडा तथा कई अन्य जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया गया है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, यातायात बाधित होने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका भी व्यक्त की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित होने की संभावना बनी रहेगी।
14 राज्यों में येलो अलर्ट, कई क्षेत्रों में वज्रपात का खतरा
मौसम विभाग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड सहित कुल 14 राज्यों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ मेघगर्जन और वज्रपात की आशंका बनी हुई है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन तथा मैदानी इलाकों में जलभराव जैसी परिस्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसूनी बादलों की सघनता और स्थानीय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से कुछ स्थानों पर अल्प अवधि में अत्यधिक वर्षा दर्ज की जा सकती है। ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को लगातार निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी ने बढ़ाई मानसून की ताकत
विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी आने के कारण मानसूनी प्रणाली को पर्याप्त ऊर्जा मिल रही है। यही कारण है कि वर्षा का क्षेत्र लगातार विस्तृत हो रहा है और पूर्वी भारत से लेकर उत्तर भारत तक व्यापक प्रभाव दिखाई दे रहा है। सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र और मानसूनी अक्ष के सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर बने रहने के कारण एक अगस्त तक अधिकांश प्रभावित राज्यों में वर्षा की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि यह प्रणाली कृषि के लिए लाभकारी हो सकती है, लेकिन अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में फसलों, सड़कों और अन्य आधारभूत संरचनाओं को नुकसान पहुंचने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
असम में बाढ़ का संकट अब भी गंभीर
पूर्वोत्तर भारत विशेषकर असम में बाढ़ की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। राज्य के कई जिलों में नदियां खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर बह रही हैं, जिससे बड़ी संख्या में गांव जलमग्न हो गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 78 हो गई है, जबकि तीन लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, बिश्वनाथ और कामरूप महानगर सहित कई जिलों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं। प्रशासन अस्थायी राहत शिविरों के माध्यम से प्रभावित परिवारों को भोजन, पेयजल, दवाइयां और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है, जबकि कई इलाकों में नौकाओं के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।
जनसुरक्षा और कृषि दोनों के लिए सावधानी जरूरी
लगातार बदलते मौसम को देखते हुए मौसम विभाग ने नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। किसानों को खेतों में कार्य करते समय मेघगर्जन और वज्रपात की स्थिति में खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई है। दोपहिया वाहन चालकों और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को भी मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा करने का परामर्श दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारी वर्षा के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों, नदी-नालों और कमजोर संरचनाओं के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचना चाहिए। समय पर सावधानी और प्रशासनिक निर्देशों का पालन संभावित दुर्घटनाओं को काफी हद तक कम कर सकता है।