भोपाल। इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। ज्योतिष मठ संस्थान, भोपाल के आचार्य पं. विनोद गौतम के अनुसार, इस बार चतुर्थी तिथि चंद्रोदय तक विद्यमान रहेगी। रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र के साथ शिवयोग का संयोग भी बन रहा है। आचार्य ने स्पष्ट किया कि विवाह के बाद पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए कोई धार्मिक बाधा नहीं है। वहीं, शुक्र का उदय 28 अक्टूबर को होने से शुक्रास्त का दोष भी नहीं रहेगा।
29 अक्टूबर को रखा जाएगा करवा चौथ का व्रत
करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना के साथ रखती हैं। आचार्य पं. विनोद गौतम के अनुसार, इस वर्ष चतुर्थी तिथि सुबह संकल्प काल से लेकर रात्रि चंद्रोदय तक विद्यमान रहेगी। ऐसे में 29 अक्टूबर को व्रत और पूजन करना शास्त्रसम्मत रहेगा।
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए भी मान्य
सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट के जरिए यह दावा किया जा रहा है कि जिन महिलाओं का इसी वर्ष विवाह हुआ है, वे पहली बार करवा चौथ का व्रत नहीं रख सकतीं। आचार्य पं. विनोद गौतम ने इस दावे को निराधार बताया है। उनके अनुसार, धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु जैसे धर्मग्रंथों में पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने पर किसी प्रकार की बाधा का उल्लेख नहीं है। इसलिए नवविवाहित महिलाएं भी श्रद्धा के साथ यह व्रत कर सकती हैं।
रोहिणी-मृगशिरा नक्षत्र और शिवयोग का संयोग
इस वर्ष करवा चौथ पर रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र के साथ शिवयोग का संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा का वृषभ राशि में उच्च स्थिति में होना दांपत्य जीवन में प्रेम और सौहार्द बढ़ाने वाला माना जाता है। आचार्य के अनुसार, यह संयोग पति-पत्नी के बीच आपसी प्रेम और प्रीति को मजबूत करने वाला है।
शुक्रास्त का दोष नहीं, भद्रा भी नहीं
आचार्य पं. विनोद गौतम के मुताबिक, इस बार करवा चौथ के दिन शुक्रास्त का दोष नहीं रहेगा, क्योंकि शुक्र का उदय 28 अक्टूबर को सुबह हो जाएगा। इसके साथ ही 29 अक्टूबर को भद्रा भी नहीं है। ऐसे में महिलाएं पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ निर्जल व्रत रखकर पूजन कर सकती हैं।
रात 8:24 बजे होगा चंद्रोदय
इस वर्ष करवा चौथ पर चंद्रोदय का संभावित समय रात 8:24 बजे बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा के क्षितिज से ऊपर उठने और स्पष्ट दिखाई देने पर अर्घ्य देकर पूजा की जाती है। हालांकि, स्थानीय मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चंद्र दर्शन के समय में अंतर हो सकता है।
बादल और बूंदाबांदी से चंद्र दर्शन में हो सकती है देरी
आचार्य के अनुसार, शुक्र उदय के कारण आकाश में बादल और बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। इसके चलते कुछ शहरों में चंद्रमा दिखाई देने में देरी हो सकती है। ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं को स्थानीय मौसम और चंद्रोदय की स्थिति का ध्यान रखना चाहिए।
बंगाल में दशरथ चतुर्थी के नाम से भी प्रसिद्ध
करवा चौथ का पर्व देश के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। आचार्य पं. विनोद गौतम के अनुसार, बंगाल में इस पर्व को दशरथ चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है।