भोपाल. मध्य प्रदेश में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने समय पर सक्रियता तो दिखाई है, लेकिन इसका वितरण अत्यंत असमान बना हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में अत्यधिक वर्षा दर्ज की जा रही है, जबकि कुछ जिले अब भी सामान्य बारिश का इंतजार कर रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान में मानसून संवहनीय प्रकृति का है, जिसके कारण सीमित क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा होती है और आसपास के इलाके अपेक्षाकृत सूखे रह जाते हैं। यही कारण है कि प्रदेश में एक साथ बाढ़ और सूखे जैसी विपरीत परिस्थितियां देखने को मिल रही हैं।
'क्लाउड बर्स्ट' जैसी बारिश की आशंका ने बढ़ाई सतर्कता
मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वर्तमान परिस्थितियों में संवहनीय बादलों की तीव्र सक्रियता के कारण कुछ क्षेत्रों में अत्यल्प समय में अत्यधिक वर्षा हो सकती है, जिसे सामान्य भाषा में 'क्लाउड बर्स्ट' जैसी स्थिति कहा जाता है। हालांकि वास्तविक क्लाउड बर्स्ट एक विशेष मौसमीय घटना होती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर अत्यधिक तीव्र वर्षा से बाढ़, जलभराव और भूस्खलन जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों पर लगातार नजर रखनी चाहिए और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए।
एक ओर मूसलाधार बारिश, दूसरी ओर भीषण गर्मी का प्रकोप
प्रदेश में मौसम की असमानता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विदिशा और बालाघाट जैसे क्षेत्रों में लगातार भारी बारिश दर्ज की जा रही है, जबकि बुंदेलखंड तथा ग्वालियर-चंबल अंचल अब भी तेज गर्मी और उमस की चपेट में हैं। नौगांव में अधिकतम तापमान 41.6 डिग्री सेल्सियस और ग्वालियर में 40.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे लोगों को गर्म हवाओं और उमस का सामना करना पड़ा। इसके विपरीत जिन क्षेत्रों में अच्छी वर्षा हुई है, वहां तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई और रात्रिकालीन मौसम अपेक्षाकृत ठंडा बना हुआ है।
मानसूनी द्रोणिका और चक्रवाती परिसंचरण बढ़ा रहे नमी
मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान से ओडिशा तक फैली मानसूनी द्रोणिका तथा गुजरात के ऊपर सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण प्रदेश में लगातार नमी पहुंचा रहे हैं। इन दोनों मौसमीय प्रणालियों के प्रभाव से बादलों का विकास तेजी से हो रहा है और गरज-चमक के साथ वर्षा की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे-जैसे नमी की मात्रा बढ़ेगी, वैसे-वैसे प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में भी वर्षा की संभावना मजबूत होती जाएगी। इससे लंबे समय से कम बारिश झेल रहे जिलों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
अगले पांच दिन जारी रहेगा तेज बारिश और वज्रपात का दौर
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 26 जून से 1 जुलाई तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस अवधि में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, सागर सहित अनेक संभागों में गरज-चमक के साथ तेज वर्षा, वज्रपात तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना व्यक्त की गई है। मौसम विभाग ने लोगों को खुले मैदान, ऊंचे पेड़ों तथा बिजली के खंभों के पास जाने से बचने की सलाह दी है। किसानों को भी मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाने की सलाह दी गई है।
कृषि और जनजीवन पर रहेगा मौसम का सीधा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की यह असमान सक्रियता खरीफ फसलों की बुवाई और सिंचाई व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। जिन क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा होगी वहां जलभराव और फसल क्षति का खतरा रहेगा, जबकि कम वर्षा वाले इलाकों में बुवाई प्रभावित हो सकती है। प्रशासन ने संबंधित जिलों को सतर्क रहने, आपदा प्रबंधन तंत्र को सक्रिय रखने तथा संभावित आपात स्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए हैं। आने वाले कुछ दिन प्रदेश के मौसम और कृषि दोनों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।