मध्य प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। देवास जिले के सोनकच्छ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने कार्यकर्ताओं के बीच अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए ऐसे बयान दिए, जिसने प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती भाजपा नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर की गुटबाजी और आपसी खींचतान है। अपने संबोधन के दौरान अजय सिंह ने न केवल 2018 के विधानसभा चुनावों का जिक्र किया, बल्कि उन परिस्थितियों को भी याद किया, जब कांग्रेस की सरकार तो बनी, लेकिन वे खुद चुनाव हार गए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को एकजुट होने का संदेश देते हुए कहा कि अगर पार्टी को फिर से सत्ता में लौटना है, तो पहले अंदरूनी मतभेद खत्म करने होंगे।
‘भाजपा नहीं, अपने ही कांग्रेस को कमजोर कर रहे’
कार्यकर्ताओं से बातचीत के दौरान अजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस आज कमजोर नहीं है, लेकिन कुछ लोग जानबूझकर पार्टी को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो कार्यकर्ता किसी कारण से नाराज या उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, उन्हें फिर से साथ लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर सभी लोग एकजुट होकर काम करें, तो कांग्रेस को मजबूत होने से कोई नहीं रोक सकता। लेकिन पार्टी के भीतर की गुटबाजी और व्यक्तिगत राजनीति संगठन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
‘25 साल से सत्ता से बाहर, नई पीढ़ी ने कांग्रेस सरकार देखी ही नहीं’
अजय सिंह ने प्रदेश में कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस को सत्ता से बाहर हुए करीब 25 साल हो चुके हैं। ऐसे में आज की युवा पीढ़ी ने कभी कांग्रेस की सरकार देखी ही नहीं है। उन्होंने कहा कि 30 साल की उम्र के युवाओं को सिर्फ भाजपा का शासन याद है। यह स्थिति कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है और संगठन को युवाओं के बीच अपनी पहचान मजबूत करनी होगी।
2018 का दर्द याद कर बोले- सरकार बनी, लेकिन मैं हार गया
अपने राजनीतिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए अजय सिंह ने कहा कि 2018 के विधानसभा चुनाव में वे लगातार कमलनाथ के साथ प्रदेशभर में प्रचार अभियान में व्यस्त रहे। इसी वजह से वे अपने क्षेत्र को पर्याप्त समय नहीं दे पाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार तो बन गई, लेकिन वे खुद चुनाव हार गए। अगर वे अपने क्षेत्र में दो दिन भी और दे देते, तो शायद हार का सामना नहीं करना पड़ता। हालांकि बाद में लगातार क्षेत्र में काम करने का फायदा मिला और अगली बार बड़ी जीत हासिल हुई।
टिकट की चिंता छोड़ो, पहले सरकार बनाओ
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा कि टिकट किसे मिलेगा, इसकी चिंता करने से पहले पार्टी को सत्ता में वापस लाने के लिए मेहनत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो नेता और कार्यकर्ता क्षेत्र में मेहनत करेंगे, जनता के बीच सक्रिय रहेंगे, उन्हें टिकट अपने आप मिलेगा। सबसे पहले कांग्रेस की सरकार बनाना जरूरी है।
मीनाक्षी नटराजन विवाद पर भी साधा निशाना
अपने संबोधन के दौरान अजय सिंह ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने पार्टी के कुछ नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि टिकट काटने वाले कई लोग अब खुद ही मुश्किलों में फंस गए हैं। उनके इस बयान को कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर बड़ा संकेत माना जा रहा है। हालांकि उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।
कांग्रेस की सरकार बनने तक नहीं पहनेंगे माला और साफा
अजय सिंह ने कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं के सामने एक बड़ा संकल्प भी दोहराया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से वे बिना किसी औपचारिक जिम्मेदारी के प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर रहे हैं और पुराने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को फिर से संगठन से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि जब तक मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं बन जाती, तब तक वे न तो माला पहनेंगे और न ही सिर पर साफा बांधेंगे।
सोनकच्छ में बड़ी संख्या में पहुंचे कार्यकर्ता
इस कार्यक्रम में सोनकच्छ और हाटपिपल्या विधानसभा क्षेत्र के बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। अजय सिंह के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनके बयान ने कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी और संगठनात्मक चुनौतियों को एक बार फिर सार्वजनिक कर दिया है।