जयपुर। राजस्थान में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की दिशा में भजनलाल सरकार ने बड़ा कदम उठा दिया है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो "राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड-2026" का मसौदा तैयार करेगी। इसके साथ ही उत्तराखंड के बाद राजस्थान देश का दूसरा ऐसा राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ गया है, जहां UCC लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा लंबे समय से समान नागरिक संहिता को अपने प्रमुख वैचारिक एजेंडे का हिस्सा मानती रही है। ऐसे में 2028 विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे को आगे बढ़ाकर पार्टी अपने समर्थक वर्ग को बड़ा संदेश देने की कोशिश कर रही है।
क्या बदल सकते हैं नियम?
प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक कानूनों में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करना है।
UCC में संभावित बड़े प्रावधान
| प्रावधान | संभावित बदलाव |
|---|---|
| विवाह | शादी का अनिवार्य पंजीकरण |
| तलाक | सभी समुदायों के लिए समान प्रक्रिया |
| बहुविवाह | बहुविवाह पर रोक |
| लिव-इन रिलेशनशिप | रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जा सकता है |
| पैतृक संपत्ति | बेटा और बेटी को समान अधिकार |
| उत्तराधिकार | समान नागरिक कानून के तहत व्यवस्था |
| आदिवासी परंपराएं | संवैधानिक सुरक्षा और परंपराएं यथावत |
उत्तराखंड के बाद राजस्थान की तैयारी
14 अप्रैल को हुई कैबिनेट बैठक में UCC लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। अब समिति के गठन के साथ सरकार ने इस दिशा में औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। समिति विभिन्न संभागों में जनसंवाद कर आम लोगों और सामाजिक संगठनों से सुझाव भी लेगी।
महिला अधिकार और समान न्याय पर सरकार का फोकस
राज्य सरकार का मानना है कि समान नागरिक संहिता महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने, विवाह और तलाक की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने तथा विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद असमानताओं को खत्म करने की दिशा में बड़ा सुधार साबित हो सकती है।
2028 चुनाव से पहले वैचारिक मुद्दों पर दांव
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, राम मंदिर, अनुच्छेद-370 और तीन तलाक के बाद UCC भाजपा और संघ परिवार के प्रमुख एजेंडों में शामिल रहा है। ऐसे में 2028 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी विकास के साथ-साथ वैचारिक मुद्दों को भी राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाना चाहती है।
विपक्ष के लिए चुनौती बन सकता है मुद्दा
भाजपा इस मुद्दे को "महिला सशक्तिकरण" और "समान न्याय" से जोड़कर पेश कर रही है। ऐसे में विपक्ष के लिए इसका सीधा विरोध करना आसान नहीं होगा। हालांकि कांग्रेस और कुछ सामाजिक संगठनों की ओर से यह सवाल भी उठाया जा सकता है कि क्या सरकार बेरोजगारी, महंगाई और स्थानीय निकाय चुनाव जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए वैचारिक बहस को आगे बढ़ा रही है।
जनसंवाद के जरिए बनेगी सहमति
सरकार ने समिति को विभिन्न क्षेत्रों में जाकर लोगों से सुझाव लेने की जिम्मेदारी भी दी है। इससे सरकार यह संदेश देना चाहती है कि प्रस्तावित कानून किसी एक समुदाय को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि व्यापक सहमति और परामर्श के आधार पर तैयार किया जाएगा।
एक नजर में राजस्थान UCC-2026
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| राज्य | राजस्थान |
| पहल | यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) |
| समिति अध्यक्ष | जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई |
| उद्देश्य | समान नागरिक कानून लागू करना |
| संभावित प्रावधान | शादी, तलाक, संपत्ति, लिव-इन रजिस्ट्रेशन |
| विशेष प्रावधान | आदिवासी परंपराओं को सुरक्षा |
| राजनीतिक महत्व | 2028 चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा |