भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। भोपाल के प्रशासन अकादमी में राज्य स्तरीय समिति की अहम बैठक हुई, जिसमें राजनीतिक दलों, आयोगों और धर्मगुरुओं से सुझाव लिए गए। बैठक में जहां बीजेपी और सीपीआई की मौजूदगी रही, वहीं कांग्रेस सहित कई प्रमुख दलों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। बैठक के दौरान धर्मगुरुओं की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं।
समिति की बैठक और प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति UCC का अंतिम प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया में है। हालांकि उनकी अनुपस्थिति में समिति के अन्य सदस्यों ने अलग-अलग सत्रों में विभिन्न पक्षों से सुझाव लिए। इसमें रिटायर्ड IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, बुद्ध सिंह, गोपाल शर्मा, अनूप नायर और शोभा पैठणकर सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
राजनीतिक दलों की उपस्थिति और अनुपस्थिति
बैठक में देश की 6 राष्ट्रीय पार्टियों - बीजेपी, कांग्रेस, बसपा, आम आदमी पार्टी और सीपीआई सहित अन्य दलों को आमंत्रित किया गया था। लेकिन केवल बीजेपी और सीपीआई के प्रतिनिधि ही शामिल हुए। कांग्रेस सहित अन्य दलों की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
सीपीआई का विरोध और सवाल
सीपीआई प्रतिनिधि पीवी रामचंद्रन ने UCC का विरोध करते हुए कहा कि देश को फिलहाल महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि UCC लागू होने से आदिवासी और अन्य समुदायों की पारंपरिक व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है, इसलिए इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए।
धर्मगुरुओं की सख्त प्रतिक्रिया
बैठक में शहर काजी मुस्ताक अली नदवी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ उनके समुदाय का संवैधानिक अधिकार है और इसे किसी भी स्थिति में नहीं बदला जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यह मुद्दा “बर्र का छत्ता” है, जिसे छेड़ने पर हालात संभालना मुश्किल हो सकता है। हाजी हारून ने भी लिव-इन रिलेशनशिप और पश्चिमी कानूनों को लेकर विरोध जताते हुए कहा कि भारत की सामाजिक व्यवस्था अलग है और इसे बाहरी मॉडलों से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
बीजेपी ने दिए 10 सुझाव
बीजेपी की ओर से प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी और संयोजक एसएस उप्पल ने समिति को 10 लिखित सुझाव सौंपे। इनमें विवाह पंजीकरण अनिवार्य करने, संपत्ति में समान अधिकार, तलाक और गोद लेने के नियमों में समानता तथा डिजिटल प्रणाली को मजबूत करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
पारिवारिक कानूनों पर सुझाव
बीजेपी ने सुझाव दिया कि सभी धर्मों में विवाह की न्यूनतम कानूनी आयु पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय होनी चाहिए। बिना पंजीकरण विवाह को अमान्य घोषित करने और उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव भी दिया गया।
संपत्ति, तलाक और अधिकारों पर समानता
सुझावों में कहा गया कि पैतृक और स्व-अर्जित संपत्ति में बेटे और बेटी को समान अधिकार मिले। तलाक की स्थिति में पति-पत्नी को 50-50 प्रतिशत संपत्ति का अधिकार देने का सुझाव दिया गया, ताकि आर्थिक असमानता न रहे।
डिजिटल व्यवस्था और न्याय सुधार
बीजेपी ने विवाह, तलाक और वसीयत के लिए राष्ट्रीय डिजिटल पोर्टल बनाने और पारिवारिक विवादों के निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट व्यवस्था लागू करने की भी सिफारिश की।
अन्य आयोगों की भागीदारी
बैठक में महिला आयोग, मानव अधिकार आयोग, बाल संरक्षण आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग के प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव रखे। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी विभागों ने प्रेजेंटेशन के जरिए अपने प्रस्ताव समिति के सामने प्रस्तुत किए।