तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु मुद्दे को लेकर चल रही कूटनीतिक कोशिशों के बीच एक नया विवाद सामने आ गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस दावे को ईरान ने खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि तेहरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को देश में प्रवेश की अनुमति देने पर सहमत हो गया है। ईरान ने साफ कहा है कि उसने ऐसी कोई नई सहमति नहीं दी है और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ सहयोग केवल पहले से मौजूद कानूनी और सुरक्षा समझौतों के तहत ही जारी रहेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की वार्ता हुई है और दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के प्रयास जारी हैं। हालांकि, दोनों पक्षों के बयानों में बड़ा अंतर यह संकेत देता है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर अब भी कई अहम मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।
IAEA के साथ सहयोग जारी रहेगा, लेकिन नई अनुमति नहीं
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने सरकारी समाचार एजेंसी IRNA से बातचीत में कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ ईरान का सहयोग पहले की तरह जारी रहेगा, लेकिन यह सहयोग केवल मौजूदा सुरक्षा समझौतों और देश के कानूनी ढांचे के तहत ही होगा। उन्होंने कहा कि संसद द्वारा पारित कानूनों और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के फैसलों के अनुरूप ही एजेंसी के साथ सभी गतिविधियां संचालित की जाएंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान ने निरीक्षण व्यवस्था को लेकर कोई नई प्रतिबद्धता नहीं दी है।
स्विट्जरलैंड वार्ता के बाद जेडी वेंस ने किया था बड़ा दावा
स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बातचीत को सकारात्मक बताया था। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच सफल अंतिम समझौते की मजबूत नींव रखी गई है। वेंस ने कहा था कि बातचीत के पहले दिन अच्छे परिणाम मिले हैं और निरीक्षण तंत्र को और मजबूत करने पर भी सहमति बनी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके।
परमाणु कार्यक्रम पर कोई नई चर्चा नहीं हुई: ईरान
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वार्ता से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बातचीत के दौरान ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई नई चर्चा नहीं की और न ही किसी अतिरिक्त परमाणु प्रतिबद्धता को स्वीकार किया। सूत्रों के मुताबिक, भविष्य में यदि परमाणु मुद्दे पर कोई औपचारिक वार्ता होती है तो उसका आधार 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) का पैराग्राफ-13 होगा। इसके तहत निर्धारित शर्तें पूरी होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
अभी आसान नहीं दिख रहा व्यापक समझौते का रास्ता
वाशिंगटन और तेहरान के अलग-अलग दावों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देशों के बीच अभी भी कई संवेदनशील मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। यूरेनियम संवर्धन, परमाणु कार्यक्रम की निगरानी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषय अब भी विवाद का कारण बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहने के बावजूद किसी व्यापक समझौते तक पहुंचने का रास्ता अभी लंबा और चुनौतीपूर्ण है।
प्रमुख अपडेट एक नजर में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| विवाद का मुद्दा | परमाणु निरीक्षकों को अनुमति देने का दावा |
| अमेरिकी पक्ष | जेडी वेंस ने सकारात्मक प्रगति का दावा किया |
| ईरान का जवाब | किसी नई अनुमति से किया इनकार |
| वार्ता का स्थान | बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट, स्विट्जरलैंड |
| ईरानी रुख | केवल मौजूदा समझौतों के तहत सहयोग |
| मुख्य विवाद | परमाणु कार्यक्रम और निरीक्षण व्यवस्था |
| आगे की संभावना | व्यापक समझौते का रास्ता अभी कठिन |