भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने मत्स्य क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार का मजबूत आधार बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में स्पष्ट कहा कि प्रदेश को मछली उत्पादन के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने विभाग को लक्ष्य दिया कि अगले ढाई वर्षों में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए कि प्रदेश को मछली बीज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि मत्स्य पालन केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
₹9 हजार करोड़ से अधिक का निवेश, मत्स्य क्षेत्र को मिलेगी नई उड़ान
बैठक में जानकारी दी गई कि एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। नीति के तहत प्रदेश में मछली पालन और इससे जुड़े उद्योगों में 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इसके लिए 2 लाख 91 हजार 938 केज (Cage Culture) संबंधी प्रस्तावों पर कार्यादेश भी जारी किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निवेश न केवल उत्पादन बढ़ाएगा, बल्कि मत्स्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी पैदा करेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निवेश परियोजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए ताकि इसका लाभ सीधे मछुआ समुदाय और ग्रामीण युवाओं तक पहुंच सके।
हर जिले में बनेगी हैचरी, मछली बीज उत्पादन पर रहेगा विशेष फोकस
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण मछली बीज की उपलब्धता बेहद जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि हर जिले में कम से कम एक आधुनिक हैचरी विकसित की जाए, जिससे मछुआरों को समय पर मछली बीज उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई क्षेत्रों में मछली बीज के लिए बाहरी राज्यों पर निर्भरता बनी हुई है, जिसे समाप्त करना आवश्यक है। यदि स्थानीय स्तर पर बीज उत्पादन बढ़ेगा तो लागत कम होगी और उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री ने इसे आत्मनिर्भर मत्स्य क्षेत्र की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मोती उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा, अन्य राज्यों के मॉडल का होगा अध्ययन
बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में मोती उत्पादन की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि देश के उन राज्यों का अध्ययन किया जाए जहां मोती उत्पादन सफलतापूर्वक किया जा रहा है। वहां की बेहतर कार्यप्रणालियों और तकनीकों को मध्यप्रदेश में लागू करने की रणनीति तैयार की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मत्स्य क्षेत्र के साथ-साथ मोती उत्पादन भी किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। सरकार इस क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव सहयोग देने को तैयार है।
कोल्ड चेन और निर्यात नेटवर्क मजबूत करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ते मछली उत्पादन के साथ-साथ भंडारण और विपणन व्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में कोल्ड चेन नेटवर्क, प्रोसेसिंग यूनिट और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास किया जाए। साथ ही मछली उत्पादों की ब्रांडिंग और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए मजबूत नेटवर्क विकसित किया जाए। उनका मानना है कि यदि उत्पादन के साथ विपणन तंत्र को भी सशक्त बनाया गया, तो मध्यप्रदेश देश के प्रमुख मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है।
जल संरक्षण और पर्यटन से भी जुड़ेगा मत्स्य विकास
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में कहा कि मत्स्य विकास को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर जल संरक्षण और पर्यटन से भी जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने नदियों के पुनर्जीवन, जलीय जीवों के संरक्षण और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही जलाशयों और नदी क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को विकसित करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने को कहा। उनका कहना था कि इससे स्थानीय लोगों को अतिरिक्त रोजगार मिलेगा और प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
मछुआ किसान क्रेडिट कार्ड में देश में दूसरा स्थान
बैठक में यह भी बताया गया कि मछुआ किसान क्रेडिट कार्ड योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। अंतर्देशीय जल क्षेत्र श्रेणी में प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर अंतर्देशीय मत्स्य पालन में सिवनी जिले को वर्ष 2023-24 के लिए प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर विभागीय अधिकारियों और मछुआ समुदाय को बधाई देते हुए कहा कि यह प्रदेश के लिए गर्व का विषय है और भविष्य में इसे और बेहतर बनाने के प्रयास जारी रहेंगे।