आज धूमावती जयंती का पावन पर्व मनाया जा रहा है। दस महाविद्याओं में शामिल मां धूमावती को वैराग्य, तप, त्याग और आध्यात्मिक शक्ति की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां धूमावती की विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन के संकट दूर होते हैं और शत्रु बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
धूमावती जयंती के शुभ मुहूर्त
- प्रातः संध्या: सुबह 04:24 बजे से 05:24 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:55 बजे से 12:51 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:43 बजे से 03:39 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:21 बजे से 07:41 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात्रि 12:03 बजे से 12:43 बजे तक (23 जून)
मां धूमावती की पूजा विधि
धूमावती जयंती के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ कर चौकी पर मां धूमावती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद दीपक और धूप जलाकर पूजा आरंभ करें।
पूजा के दौरान इस मंत्र का 108 बार जाप करें:
"ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्।। धूं धूं धूमावती ठः ठः।।"
मां धूमावती को नमकीन भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। भुने चने, दालमोठ, कचौरी और काले तिल का भोग लगाया जा सकता है। अंत में आरती कर पूजा संपन्न करें।
मां धूमावती की उत्पत्ति कथा
धार्मिक कथाओं के अनुसार, राजा दक्ष द्वारा भगवान शिव का अपमान किए जाने पर देवी सती ने यज्ञ कुंड में आत्मदाह कर लिया था। कहा जाता है कि उनके जलते हुए शरीर से निकले धुएं से मां धूमावती प्रकट हुईं।
एक अन्य मान्यता के अनुसार, माता पार्वती को अत्यधिक भूख लगने पर जब भगवान शिव ने भोजन नहीं दिया, तो उन्होंने स्वयं शिव को निगल लिया। इसके बाद उनके शरीर से धुएं का विशाल गुबार निकला, जिससे मां धूमावती का स्वरूप प्रकट हुआ।
धूमावती जयंती का धार्मिक महत्व
मां धूमावती की पूजा विशेष रूप से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति, शत्रु नाश और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति के लिए की जाती है। तांत्रिक साधनाओं और महाविद्या उपासना में भी इस दिन का विशेष महत्व माना गया है।