पटना - अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर बिहार सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि राज्य सरकार अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में योग को शामिल करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक संतुलन का प्रभावी माध्यम है।
योग के प्रति जागरूक करना आवश्यक है
पटना के कंकड़बाग स्थित पाटलिपुत्र खेल परिसर में आयोजित 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं और विद्यार्थियों को बचपन से ही योग के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। योग को शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाकर विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास को नई दिशा दी जा सकती है।
स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि योग को पाठ्यक्रम में शामिल करने का उद्देश्य छात्रों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि सरकार चाहती है कि नई पीढ़ी तनावमुक्त, अनुशासित और स्वस्थ बने। योग के माध्यम से विद्यार्थियों में एकाग्रता, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का विकास होगा, जिससे उनकी पढ़ाई और व्यक्तित्व दोनों को लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम में सामूहिक योगाभ्यास किया गया
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, राज्यसभा सांसद रामनाथ ठाकुर, विधायक मंगल पांडेय, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और पुलिस महानिदेशक विनय कुमार सहित कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास भी किया।
योग को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ा जाएगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार योग को जन-जन तक पहुंचाने और इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए लगातार प्रयास करेगी। यदि यह योजना लागू होती है, तो बिहार उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां योग को औपचारिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।