मध्य प्रदेश में किसानों को खाद वितरण के दौरान आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने ई-विकास प्रणाली की समीक्षा शुरू कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक राज्यस्तरीय समिति गठित की है, जो किसान संगठनों और संबंधित विभागों से सुझाव लेकर व्यवस्था में जरूरी सुधारों की सिफारिश करेगी।
समिति को अध्ययन पूरा कर एक सप्ताह के भीतर अपनी अनुशंसाएं राज्य सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। समीक्षा में ई-विकास प्रणाली के क्रियान्वयन, तकनीकी बाधाओं और जमीनी स्तर पर सामने आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों का परीक्षण किया जाएगा।
किसान संगठनों के सुझावों को रिपोर्ट में मिलेगी जगह
सरकार ने समिति को केवल विभागीय अधिकारियों से जानकारी लेने तक सीमित नहीं रखा है। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से भी बातचीत कर उनकी आपत्तियों और सुझावों को रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
समिति इस बात का आकलन करेगी कि डिजिटल खाद वितरण व्यवस्था को किसानों के लिए अधिक सरल कैसे बनाया जा सकता है। इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि ऑनलाइन प्रक्रिया, आधार सत्यापन, मोबाइल ओटीपी, किसान पंजीकरण, खाद की उपलब्धता और वितरण केंद्रों से जुड़ी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान क्या हो सकता है। समिति का अंतिम कार्यक्षेत्र आदेश में वर्णित समीक्षा और किसान संगठनों से सुझाव लेने पर केंद्रित है।
समिति में कौन-कौन शामिल?
राज्य सरकार की ओर से गठित समिति में कृषि, सहकारिता और जिला प्रशासन से जुड़े अधिकारियों को शामिल किया गया है।
| जिम्मेदारी | अधिकारी या पद |
|---|---|
| अध्यक्ष | कृषि उत्पादन आयुक्त, मध्य प्रदेश |
| सदस्य | प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ, भोपाल |
| सदस्य | आयुक्त, नर्मदापुरम संभाग |
| सदस्य | कलेक्टर, नर्मदापुरम |
| सदस्य | कलेक्टर, हरदा |
| सदस्य-सचिव | उप सचिव, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग |
नर्मदापुरम और हरदा के कलेक्टरों को शामिल किए जाने से समिति को खेत और वितरण केंद्र स्तर पर सामने आई समस्याओं की जानकारी मिलने की उम्मीद है। दोनों जिलों के प्रशासनिक अनुभवों का इस्तेमाल प्रदेशव्यापी व्यवस्था में सुधार के लिए किया जा सकता है। यह समिति की संरचना के आधार पर एक प्रशासनिक अनुमान है; अंतिम सिफारिशें रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होंगी।
रिपोर्ट में किन मुद्दों की समीक्षा हो सकती है?
समिति मुख्य रूप से ई-विकास प्रणाली की तकनीकी और व्यावहारिक कठिनाइयों का परीक्षण करेगी। समीक्षा के दौरान इन मुद्दों पर विचार होने की संभावना है:
- ई-टोकन या स्लॉट बुकिंग में तकनीकी परेशानी
- सर्वर, मोबाइल नेटवर्क और ओटीपी से जुड़ी दिक्कतें
- किसान आईडी और भूमि रिकॉर्ड के मिलान की प्रक्रिया
- बटाईदार, सिकमी और संयुक्त खाताधारी किसानों की पात्रता
- जरूरत के समय खाद नहीं मिलने या वितरण में देरी की शिकायतें
- सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के रिकॉर्ड में एकरूपता
- ऑनलाइन और ऑफलाइन वितरण के बीच समन्वय
- किसानों के लिए शिकायत और समस्या समाधान व्यवस्था
राज्य सरकार ने अभी समिति की प्रश्नावली या विस्तृत विचार-विषय सार्वजनिक नहीं किए हैं। इसलिए इन बिंदुओं को उपलब्ध शिकायतों और ई-विकास प्रणाली के मौजूदा संचालन ढांचे के आधार पर संभावित समीक्षा विषय माना जाना चाहिए।
क्या है ई-विकास खाद वितरण प्रणाली?
ई-विकास का पूरा नाम वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान है। इसे किसानों को समय पर और समान रूप से उर्वरक उपलब्ध कराने तथा खाद की आपूर्ति को डिजिटल तरीके से ट्रैक करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था।
आधिकारिक पोर्टल के अनुसार व्यवस्था में उर्वरक की आवाजाही की रियल-टाइम निगरानी, किसान की भूमि और फसल की जरूरत के अनुसार वितरण तथा अधिकारियों के लिए समयबद्ध रिपोर्टिंग जैसी सुविधाओं की परिकल्पना की गई है। पोर्टल को एग्रीस्टैक, फार्मर आईडी, भूमि रिकॉर्ड और फसल पैटर्न से जोड़ा गया है।
अप्रैल 2026 से प्रदेशभर में लागू हुई थी व्यवस्था
ई-विकास प्रणाली का शुरुआती परीक्षण अक्टूबर 2025 में मध्य प्रदेश के तीन जिलों में किया गया था। इसके बाद इसे 1 अप्रैल 2026 से सभी 55 जिलों में लागू किया गया।
मई 2026 में मध्य प्रदेश के कृषि सचिव ने बताया था कि उस समय तक लगभग 13 लाख किसान व्यवस्था से लाभान्वित हुए और करीब दो लाख टन उर्वरक का वितरण प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया गया था। उन्होंने लंबी कतारों में कमी का दावा किया था, लेकिन डिजिटल पहुंच, आवंटन और शुरुआती तकनीकी देरी जैसी चुनौतियों को भी स्वीकार किया था।
किसान आंदोलन के बाद स्थगित हुई ई-टोकन की अनिवार्यता
खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था को लेकर किसान संगठनों ने पिछले दिनों विरोध दर्ज कराया था। किसानों का कहना था कि तकनीकी बाधाओं और ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण समय पर उर्वरक लेने में परेशानी हो रही है।
किसान प्रतिनिधियों और राज्य सरकार के बीच हुई बातचीत के बाद ई-टोकन आधारित खाद वितरण को समीक्षा पूरी होने तक तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की घोषणा की गई। कृषि मंत्री के अनुसार समिति की अनुशंसाएं मिलने और आवश्यक बदलाव किए जाने तक ई-टोकन प्रणाली अनिवार्य नहीं रहेगी।
अभी हाइब्रिड मोड से किया जा रहा खाद वितरण
ई-विकास की समीक्षा पूरी होने तक प्रदेश में खाद वितरण के लिए हाइब्रिड व्यवस्था अपनाई गई है। इसके तहत तकनीकी समस्या के कारण किसानों को खाद देने से इनकार नहीं किया जाएगा। बिक्री का विवरण पहले ऑफलाइन रिकॉर्ड में दर्ज किया जा सकेगा और बाद में उसे ई-विकास पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
नई व्यवस्था में विक्रेताओं को किसान के आधार कार्ड की प्रति, मोबाइल नंबर और कंपनीवार खरीदे गए उर्वरक की मात्रा का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा। यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी और एमओपी सहित अलग-अलग खाद का विवरण निर्धारित प्रारूप में दर्ज किया जाएगा।
पैक्स से लेकर निजी दुकानों तक लागू होगी व्यवस्था
हाइब्रिड वितरण व्यवस्था का पालन प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों यानी पैक्स, मार्कफेड के डबल लॉक केंद्रों, एमपी एग्रो और निजी उर्वरक विक्रेताओं को करना होगा।
विक्रेताओं को बिक्री का ऑफलाइन रिकॉर्ड तैयार करने के बाद संबंधित जानकारी पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। जिला प्रशासन को खाद विक्रेताओं और वितरण एजेंसियों की बैठक कर नई प्रक्रिया समझाने तथा वितरण व्यवस्था की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों को अभी खाद कैसे मिलेगी?
हाइब्रिड व्यवस्था में किसानों को केवल पोर्टल या ई-टोकन की तकनीकी उपलब्धता पर निर्भर नहीं रहना होगा। पात्र किसान स्थानीय सहकारी समिति, मार्कफेड केंद्र, एमपी एग्रो केंद्र या अधिकृत निजी विक्रेता से खाद प्राप्त कर सकेंगे।
हालांकि, पहचान और बिक्री रिकॉर्ड के लिए आधार से संबंधित विवरण तथा मोबाइल नंबर मांगा जा सकता है। जिले के अनुसार प्रक्रिया के क्रियान्वयन में अंतर होने की स्थिति में किसान स्थानीय कृषि विभाग, सहकारी समिति या अधिकृत खाद विक्रेता से नवीनतम निर्देशों की पुष्टि करें।
समिति की रिपोर्ट के बाद क्या बदलेगा?
समिति की रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार तय करेगी कि ई-विकास प्रणाली को किस रूप में दोबारा लागू किया जाए। संभावित विकल्पों में तकनीकी सरलीकरण, ई-टोकन प्रक्रिया में बदलाव, ऑफलाइन विकल्प बनाए रखना या हाइब्रिड मॉडल को स्थायी रूप देना शामिल हो सकता है।
हालांकि, समिति की अनुशंसा अपने आप अंतिम सरकारी निर्णय नहीं होगी। रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित विभागों को सुझावों का परीक्षण करना होगा और स्वीकृत बदलावों के लिए अलग आदेश या दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि ई-टोकन व्यवस्था स्थायी रूप से समाप्त हो गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसे समीक्षा और जरूरी बदलाव पूरे होने तक स्थगित किया गया है।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
ई-विकास का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाना, वास्तविक आवश्यकता के अनुसार उर्वरक देना और स्टॉक की निगरानी करना था। दूसरी ओर, किसानों की शिकायत है कि डिजिटल प्रक्रिया तभी उपयोगी होगी, जब पोर्टल, मोबाइल नेटवर्क और सत्यापन व्यवस्था बिना रुकावट काम करे।
सरकार के सामने अब तकनीकी पारदर्शिता और किसानों की व्यावहारिक सुविधा के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि डिजिटल रिकॉर्ड बनाए रखते हुए किसानों को तत्काल और सरल तरीके से खाद कैसे उपलब्ध कराया जाएगा।
समिति और खाद वितरण की मौजूदा स्थिति एक नजर में
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| समिति का उद्देश्य | ई-विकास प्रणाली की समीक्षा और सुधार |
| समिति के अध्यक्ष | कृषि उत्पादन आयुक्त |
| रिपोर्ट की समयसीमा | एक सप्ताह |
| प्रमुख अध्ययन | तकनीकी और व्यावहारिक कठिनाइयां |
| किसानों की भागीदारी | किसान संगठनों से सुझाव लिए जाएंगे |
| ई-टोकन की स्थिति | समीक्षा तक स्थगित |
| मौजूदा वितरण व्यवस्था | हाइब्रिड मोड |
| ऑफलाइन रिकॉर्ड | आधार विवरण, मोबाइल नंबर और खाद की मात्रा |
| ऑनलाइन प्रक्रिया | बिक्री का विवरण बाद में पोर्टल पर अपलोड |
| अंतिम फैसला | समिति की रिपोर्ट और सरकार की स्वीकृति के बाद |
FAQ:
मध्य प्रदेश सरकार ने समिति क्यों बनाई है?
खाद वितरण की ई-विकास और ई-टोकन व्यवस्था में सामने आई तकनीकी तथा व्यावहारिक समस्याओं का अध्ययन करने और किसान संगठनों के सुझाव लेने के लिए समिति गठित की गई है।
समिति अपनी रिपोर्ट कब देगी?
समिति को अध्ययन पूरा कर एक सप्ताह के भीतर राज्य सरकार को अनुशंसाएं सौंपनी हैं।
क्या ई-टोकन व्यवस्था खत्म कर दी गई है?
ई-टोकन आधारित वितरण को फिलहाल स्थगित किया गया है। समिति की रिपोर्ट और जरूरी बदलाव होने के बाद सरकार इसके भविष्य पर फैसला करेगी।
अभी किसानों को खाद कैसे मिलेगा?
खाद का वितरण हाइब्रिड मोड से किया जा रहा है। विक्रेता बिक्री का ऑफलाइन रिकॉर्ड रखेंगे और बाद में जानकारी ई-विकास पोर्टल पर अपलोड करेंगे।
हाइब्रिड मोड में किसान से कौन-सी जानकारी ली जा सकती है?
विक्रेता किसान के आधार कार्ड की प्रति, मोबाइल नंबर और खरीदे गए उर्वरक की कंपनीवार तथा उत्पादवार मात्रा का विवरण दर्ज कर सकते हैं।
समिति में किसान प्रतिनिधि सदस्य हैं?
उपलब्ध समिति संरचना में किसान प्रतिनिधियों को औपचारिक सदस्य के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है। हालांकि, समिति को किसान संगठनों से सुझाव लेने हैं।