कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शुक्रवार का दिन भारत के लिए अब तक के सबसे सफल दिनों में शामिल रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने जूडो और एथलेटिक्स में कुल छह पदक जीतते हुए दो गोल्ड, दो सिल्वर और दो ब्रॉन्ज अपने नाम किए। शुक्रवार के मुकाबलों के बाद भारत के पदकों की संख्या बढ़कर 23 हो गई, जिनमें पांच स्वर्ण, 12 रजत और छह कांस्य शामिल हैं। प्रकाशित आधिकारिक पदक तालिका में भारत 10वें स्थान पर था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 जुलाई और 1 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अलग-अलग संदेश जारी कर भारत के सभी छह पदक विजेताओं—अस्मिता डे, हर्ष सिंह, यामिनी मौर्य, नीरज चोपड़ा, यश वीर सिंह और तेजस्विन शंकर—को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों की निरंतरता, समर्पण और दबाव में किए गए प्रदर्शन की सराहना की।
नीरज चोपड़ा की निरंतरता और धैर्य की PM मोदी ने की प्रशंसा
पुरुष जैवलिन थ्रो फाइनल में नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर का सीजन-बेस्ट थ्रो करते हुए सिल्वर मेडल जीता। श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने 89.75 मीटर के प्रयास के साथ गोल्ड अपने नाम किया, जबकि भारत के यश वीर सिंह 85.41 मीटर के साथ तीसरे स्थान पर रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने नीरज के प्रदर्शन को उत्कृष्ट बताते हुए कहा कि उन्होंने एक बार फिर निरंतरता, संयम और मजबूत खेल भावना का परिचय दिया है। प्रधानमंत्री के अनुसार नीरज की उपलब्धियां देश के प्रत्येक नागरिक को गौरवान्वित करती हैं। उन्होंने भारतीय जैवलिन स्टार को आगामी प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं भी दीं। नीरज ने फाइनल के अपने दूसरे प्रयास में 85.83 मीटर की दूरी हासिल की थी। वह इस थ्रो के बाद कुछ समय के लिए पहले स्थान पर भी पहुंच गए थे, लेकिन उसी राउंड में पथिरागे ने 89.75 मीटर का प्रयास करते हुए बढ़त हासिल कर ली।
यश वीर सिंह के अंतिम थ्रो ने दिलाया ब्रॉन्ज
यश वीर सिंह ने पुरुष जैवलिन फाइनल में दबाव के बीच अपने छठे और अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इस थ्रो से पहले वह पदक स्थान से बाहर थे, लेकिन आखिरी प्रयास ने उन्हें सीधे तीसरे स्थान पर पहुंचा दिया। उनका पिछला व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 83.72 मीटर था।
प्रधानमंत्री मोदी ने यश वीर के प्रदर्शन को उनके उत्साह और समर्पण का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश के कई युवा खिलाड़ियों को एथलेटिक्स और विशेष रूप से जैवलिन थ्रो की ओर आकर्षित कर सकती है। नीरज और यश वीर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो में केवल 42 सेंटीमीटर का अंतर रहा। एक ही जैवलिन स्पर्धा में भारत के दो खिलाड़ियों का पोडियम पर पहुंचना भारतीय एथलेटिक्स के लिए इस संस्करण की प्रमुख उपलब्धियों में से एक है।
तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में रचा इतिहास
तेजस्विन शंकर ने पुरुष डेकाथलॉन में कुल 7,976 अंक जुटाकर ब्रॉन्ज मेडल जीता। वह कॉमनवेल्थ गेम्स के डेकाथलॉन में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने। दो दिन तक चली इस स्पर्धा में खिलाड़ियों को 100 मीटर, लंबी कूद, शॉट पुट, ऊंची कूद, 400 मीटर, 110 मीटर बाधा दौड़, डिस्कस थ्रो, पोल वॉल्ट, जैवलिन और 1500 मीटर में प्रतिस्पर्धा करनी होती है।
तेजस्विन का यह पदक इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि वह घुटने की पुरानी समस्या से जूझते हुए प्रतियोगिता में उतरे थे। इससे पहले इसी संस्करण के हाई जंप फाइनल में चोट उभरने के कारण उन्हें मुकाबला छोड़ना पड़ा था। इसके बावजूद उन्होंने डेकाथलॉन के सभी 10 इवेंट पूरे किए और पोडियम तक पहुंचे। प्रधानमंत्री मोदी ने तेजस्विन के प्रदर्शन को सभी 10 स्पर्धाओं में किया गया शानदार ऑलराउंड प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ी लगातार नया इतिहास रचते हुए देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
यामिनी मौर्य को जूडो के 57 किग्रा वर्ग में सिल्वर
यामिनी मौर्य ने महिलाओं के 57 किलोग्राम जूडो वर्ग में रजत पदक हासिल किया। फाइनल में उनका मुकाबला इंग्लैंड की एसेलिया टोप्राक से हुआ। नियमित समय में मुकाबला बराबरी पर रहने के बाद फैसला गोल्डन स्कोर अवधि में हुआ, जहां टोप्राक ने जीत दर्ज की। प्रधानमंत्री ने यामिनी के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि जूडो के प्रति उनका जुनून मुकाबले में स्पष्ट दिखाई दिया। उन्होंने भरोसा जताया कि यामिनी का पदक आने वाले समय में कई युवाओं को जूडो अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। यामिनी का सिल्वर भारत के लिए जूडो में उस दिन का तीसरा पदक था। इससे पहले अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने अपनी-अपनी श्रेणियों में गोल्ड मेडल जीतकर भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक दिन की नींव रखी थी।
अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में रचा इतिहास
महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में अस्मिता डे ने कनाडा की हीडी क्वाच को गोल्डन स्कोर तक चले फाइनल में हराकर स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को मात देकर भारत को जूडो का दूसरा गोल्ड दिलाया। ये भारत के कॉमनवेल्थ गेम्स इतिहास में जूडो के पहले स्वर्ण पदक रहे। इससे पहले भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने इस प्रतियोगिता में सिल्वर और ब्रॉन्ज तो जीते थे, लेकिन गोल्ड हासिल नहीं किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने अस्मिता के प्रदर्शन को यादगार बताते हुए कहा कि उनकी सफलता भारत में जूडो को और लोकप्रिय बनाने में योगदान देगी। हर्ष सिंह को बधाई देते हुए उन्होंने इसे भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक दिन बताया और कहा कि उनके प्रदर्शन में मेहनत और समर्पण साफ नजर आया।
शुक्रवार को भारत के छह पदक विजेता
शुक्रवार को भारत ने जूडो से तीन और एथलेटिक्स से तीन पदक हासिल किए। आधिकारिक परिणामों के आधार पर पदक विजेताओं का विवरण इस प्रकार है:
| खिलाड़ी | खेल और स्पर्धा | प्रदर्शन | पदक |
|---|---|---|---|
| अस्मिता डे | महिला जूडो, 48 किग्रा | फाइनल में जीत | गोल्ड |
| हर्ष सिंह | पुरुष जूडो, 60 किग्रा | फाइनल में जीत | गोल्ड |
| नीरज चोपड़ा | पुरुष जैवलिन थ्रो | 85.83 मीटर | सिल्वर |
| यामिनी मौर्य | महिला जूडो, 57 किग्रा | फाइनलिस्ट | सिल्वर |
| यश वीर सिंह | पुरुष जैवलिन थ्रो | 85.41 मीटर | ब्रॉन्ज |
| तेजस्विन शंकर | पुरुष डेकाथलॉन | 7,976 अंक | ब्रॉन्ज |
भारत के कुल पदकों की संख्या 23 हुई
शुक्रवार के मुकाबले पूरे होने के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 23 हो गई। आधिकारिक तालिका में भारत पांच गोल्ड, 12 सिल्वर और छह ब्रॉन्ज के साथ 10वें स्थान पर था। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स से भारत को 11, वेटलिफ्टिंग से आठ, जूडो से तीन और पैरा पावरलिफ्टिंग से एक पदक मिला था।
| पदक | संख्या |
|---|---|
| गोल्ड | 5 |
| सिल्वर | 12 |
| ब्रॉन्ज | 6 |
| कुल | 23 |
पदक तालिका प्रतियोगिताओं के साथ लगातार बदलती है। इसलिए वेबसाइट पर संख्या या रैंक प्रकाशित करते समय इसे “शुक्रवार के मुकाबलों के बाद” या प्रकाशन के समय उपलब्ध स्थिति के रूप में लिखना अधिक सटीक होगा।
भारतीय खेलों के लिए क्यों खास रहा शुक्रवार?
इस एक दिन में भारतीय खिलाड़ियों ने अलग-अलग तरह की उपलब्धियां दर्ज कीं। अस्मिता और हर्ष ने जूडो में देश के पहले कॉमनवेल्थ गोल्ड जीते, तेजस्विन डेकाथलॉन में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने और जैवलिन में नीरज तथा यश वीर ने डबल पोडियम हासिल किया। इन नतीजों ने यह भी दिखाया कि भारतीय पदक अभियान केवल कुछ स्थापित नामों तक सीमित नहीं है। नीरज जैसे अनुभवी चैंपियन के साथ यश वीर, अस्मिता और हर्ष जैसे खिलाड़ियों ने अपने पहले बड़े कॉमनवेल्थ मंचों पर पदक जीतकर भारत के प्रदर्शन को मजबूती दी।