मध्य प्रदेश के घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक ई-केवाईसी से जुड़ा अभियान तेज कर दिया गया है। जिन उपभोक्ताओं का सत्यापन अभी लंबित है, उन्हें मोबाइल पर संदेश भेजकर 16 अगस्त 2026 से पहले ई-केवाईसी पूरी करने के लिए कहा जा रहा है। उपभोक्ताओं को भेजे जा रहे संदेश में कहा गया है कि निर्धारित तारीख तक सत्यापन नहीं होने पर वे ई-केवाईसी पूरी होने तक घरेलू दर पर सिलेंडर प्राप्त करने के पात्र नहीं रह सकते। यही संदेश देश के अन्य राज्यों में भी लंबित ई-केवाईसी वाले उपभोक्ताओं को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
16 अगस्त वाला SMS क्या कहता है?
इंडेन उपभोक्ताओं को भेजे गए संदेश में मुख्य रूप से तीन बातें बताई जा रही हैं:
- बायोमेट्रिक आधार ई-केवाईसी लंबित है।
- प्रक्रिया 16 अगस्त तक पूरी करनी है।
- सत्यापन नहीं होने पर घरेलू दर पर सिलेंडर लेने की पात्रता ई-केवाईसी पूरी होने तक प्रभावित हो सकती है।
- ई-केवाईसी घर बैठे कंपनी के मोबाइल ऐप, संबंधित गैस एजेंसी या सिलेंडर पहुंचाने वाले अधिकृत डिलीवरी कर्मचारी के माध्यम से पूरी की जा सकती है।
क्या 16 अगस्त के बाद गैस सिलेंडर मिलना बंद हो जाएगा?
इस बिंदु पर उपभोक्ताओं को सावधानी से जानकारी समझने की जरूरत है। ताजा SMS में घरेलू दर पर सिलेंडर मिलने की पात्रता प्रभावित होने की बात है, लेकिन सिलेंडर कनेक्शन हमेशा के लिए बंद होने या रिफिल की आपूर्ति पूरी तरह रोक देने का कोई स्पष्ट नया केंद्रीय आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 17 मार्च 2026 को जारी स्पष्टीकरण में कहा था कि ई-केवाईसी केवल उन उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है, जिन्होंने अभी तक प्रक्रिया पूरी नहीं की है। मंत्रालय ने उस समय यह भी कहा था कि ई-केवाईसी लंबित होने के कारण रिफिल की आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी।
दूसरी ओर, जुलाई के अंतिम सप्ताह में भेजे गए SMS में घरेलू दर पर सिलेंडर प्राप्त करने की पात्रता को ई-केवाईसी से जोड़ा गया है। इसलिए अभी सबसे सटीक स्थिति यह है कि ई-केवाईसी लंबित होने पर घरेलू मूल्य या सब्सिडी लाभ प्रभावित हो सकता है, लेकिन गैस सप्लाई पूरी तरह बंद होने का दावा पुष्ट नहीं है।
क्या घरेलू सिलेंडर के बदले कमर्शियल रेट देना होगा?
कुछ वितरक संगठनों ने आशंका जताई है कि ई-केवाईसी लंबित होने पर उपभोक्ताओं को घरेलू दर से अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। हालांकि, ऐसे उपभोक्ताओं से वास्तव में कौन-सी दर ली जाएगी, इसका स्पष्ट और समान राष्ट्रीय रेट सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए अभी यह लिखना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा कि 16 अगस्त के बाद हर लंबित उपभोक्ता को सीधे 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की दर चुकानी पड़ेगी। ताजा संदेश केवल घरेलू दर की पात्रता प्रभावित होने की बात करता है।
मध्य प्रदेश के उपभोक्ता आंकड़ों में बड़ी गड़बड़ी
प्राप्त स्थानीय जानकारी में मध्य प्रदेश में करीब 1.37 करोड़ सक्रिय घरेलू LPG उपभोक्ता और इनमें से 39.48 लाख उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी लंबित होने की बात कही गई है। इसी रिपोर्ट में लंबित उपभोक्ताओं का प्रतिशत 22.21 बताया गया है। लेकिन इन आंकड़ों में गणितीय असंगति है। 1.37 करोड़ में 39.48 लाख का हिस्सा करीब 28.8 प्रतिशत होता है, 22.21 प्रतिशत नहीं। यदि 39.48 लाख को 22.21 प्रतिशत माना जाए, तो कुल उपभोक्ताओं की संख्या करीब 1.78 करोड़ बनती है। मार्च 2026 में प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट में भी मध्य प्रदेश में 1.76 करोड़ से अधिक LPG उपभोक्ता बताए गए थे। इसलिए 1.37 करोड़ वाला आंकड़ा टाइपिंग या रिपोर्टिंग की गलती हो सकता है।
आंकड़ों की स्थिति
| दावा | गणना या उपलब्ध जानकारी |
|---|---|
| रिपोर्ट में कुल उपभोक्ता | 1.37 करोड़ |
| लंबित ई-केवाईसी | 39.48 लाख |
| रिपोर्ट में दिया प्रतिशत | 22.21% |
| 1.37 करोड़ के आधार पर वास्तविक प्रतिशत | लगभग 28.8% |
| 22.21% के आधार पर संभावित कुल संख्या | लगभग 1.78 करोड़ |
| मार्च की अन्य रिपोर्ट में कुल उपभोक्ता | 1.76 करोड़ से अधिक |
इसलिए प्रकाशन में 1.37 करोड़ और 22.21 प्रतिशत को एक साथ प्रमाणित आंकड़ा नहीं लिखना चाहिए। बेहतर होगा कि 39.48 लाख के आंकड़े को भी तेल कंपनियों या खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की आधिकारिक पुष्टि के साथ प्रकाशित किया जाए।
भोपाल के आंकड़ों में भी अलग-अलग दावे
प्राप्त जानकारी के अनुसार भोपाल में 7.55 लाख घरेलू गैस उपभोक्ता हैं, जिनमें से करीब 1.94 लाख की ई-केवाईसी लंबित है। इस हिसाब से लंबित सत्यापन वाले उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी लगभग 25.7 प्रतिशत बनती है। इसके विपरीत, 28 जुलाई को प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट में भोपाल के तीनों सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के करीब नौ लाख घरेलू उपभोक्ता और लगभग 1.35 लाख लंबित ई-केवाईसी बताई गई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ एजेंसियां डिलीवरी रोक रही थीं, जबकि तेल कंपनियों के अधिकारियों ने ऐसा कोई लिखित आदेश जारी होने से इनकार किया था। इस अंतर के कारण भोपाल के आंकड़ों को भी अंतिम आधिकारिक संख्या के बजाय अलग-अलग रिपोर्टों में सामने आए अनुमान के रूप में प्रस्तुत करना अधिक सुरक्षित है।
किन उपभोक्ताओं को ई-केवाईसी करानी है?
केंद्र सरकार के 17 मार्च के स्पष्टीकरण के अनुसार बायोमेट्रिक ई-केवाईसी मुख्य रूप से उन LPG उपभोक्ताओं के लिए है, जिनका आधार प्रमाणीकरण अभी तक पूरा नहीं हुआ है।
सामान्य घरेलू उपभोक्ता
गैर-उज्ज्वला उपभोक्ता पहले ही बायोमेट्रिक ई-केवाईसी पूरी कर चुके हैं तो उन्हें केवल पुराने होने के कारण दोबारा प्रक्रिया करने की जरूरत नहीं बताई गई थी। हालांकि, जिन उपभोक्ताओं को अब कंपनी का आधिकारिक SMS मिला है, उन्हें अपने ऐप या गैस एजेंसी से वर्तमान स्टेटस जांच लेना चाहिए।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थी
मार्च के सरकारी स्पष्टीकरण के अनुसार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के उपभोक्ताओं को लक्षित DBT सब्सिडी प्राप्त करने के लिए प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एक बार प्रमाणीकरण करना पड़ सकता है। यह व्यवस्था विशेष रूप से सात रिफिल के बाद आठवीं और नौवीं रिफिल पर मिलने वाली लक्षित सब्सिडी से जुड़ी बताई गई थी।
घर बैठे LPG ई-केवाईसी कैसे करें?
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार उपभोक्ता संबंधित तेल कंपनी का मोबाइल ऐप और UIDAI का Aadhaar FaceRD App डाउनलोड करके फेस आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पूरा कर सकते हैं। यह प्रक्रिया मुफ्त है।
इंडेन उपभोक्ता
इंडेन ग्राहक IndianOil ONE App का उपयोग कर सकते हैं।
भारत गैस उपभोक्ता
भारत गैस ग्राहक Hello BPCL App के माध्यम से प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
एचपी गैस उपभोक्ता
एचपी गैस ग्राहक HP Pay App का उपयोग कर सकते हैं।
ऐप में LPG कनेक्शन से जुड़े पंजीकृत मोबाइल नंबर से लॉग-इन करने के बाद ई-केवाईसी विकल्प चुनना होगा। इसके बाद आधार संख्या दर्ज करके Aadhaar FaceRD App के माध्यम से चेहरे का सत्यापन किया जाता है।
गैस एजेंसी जाकर कैसे कराएं सत्यापन?
मोबाइल से प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर उपभोक्ता अपनी अधिकृत गैस एजेंसी जा सकते हैं। एजेंसी पर आधार आधारित फिंगरप्रिंट, आईरिस या उपलब्ध अधिकृत बायोमेट्रिक माध्यम से सत्यापन कराया जा सकता है।
उपभोक्ता अपने साथ ये विवरण रखें:
- आधार कार्ड
- LPG उपभोक्ता संख्या या कनेक्शन विवरण
- गैस कनेक्शन से जुड़ा मोबाइल नंबर
- एजेंसी की ओर से मांगा गया अधिकृत पहचान दस्तावेज
- कुछ स्थानों पर अधिकृत डिलीवरी कर्मचारी के पास उपलब्ध डिवाइस से भी ई-केवाईसी की जा सकती है।
ई-केवाईसी कराने के लिए कोई शुल्क नहीं
आधार आधारित LPG ई-केवाईसी प्रक्रिया निशुल्क है। मोबाइल ऐप, गैस एजेंसी या अधिकृत कर्मचारी के माध्यम से प्रमाणीकरण के नाम पर उपभोक्ता से किसी निजी खाते में पैसे, शुल्क या डिजिटल भुगतान की मांग नहीं की जानी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति को आधार की फोटो, बैंक खाते की जानकारी, ATM PIN या OTP साझा न करें। ई-केवाईसी के लिए केवल संबंधित तेल कंपनी का आधिकारिक ऐप और अधिकृत गैस एजेंसी इस्तेमाल करें।
ई-केवाईसी अभियान का उद्देश्य क्या है?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार आधार आधारित प्रमाणीकरण से उपभोक्ता की वास्तविक पहचान और पात्रता सत्यापित करने में मदद मिलती है। इसका उद्देश्य निष्क्रिय या फर्जी कनेक्शनों की पहचान करना, एक से अधिक अनधिकृत कनेक्शन रोकना और घरेलू LPG के व्यावसायिक इस्तेमाल या डायवर्जन को कम करना है। इस प्रक्रिया से सरकारी सब्सिडी को पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने और तेल कंपनियों के उपभोक्ता रिकॉर्ड अपडेट करने में भी सहायता मिलती है।
डिलीवरी रुकने पर क्या करें?
ई-केवाईसी पूरी होने के बावजूद बुकिंग रद्द होने या सिलेंडर की डिलीवरी न मिलने पर उपभोक्ता सबसे पहले संबंधित गैस एजेंसी से लिखित या डिजिटल कारण मांग सकते हैं। इसके बाद कंपनी के आधिकारिक मोबाइल ऐप या ग्राहक सेवा माध्यम पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के आधिकारिक पोर्टल पर सामान्य LPG टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-233-3555 और उज्ज्वला हेल्पलाइन 1800-266-6696 दी गई है। गैस लीकेज जैसी आपात स्थिति के लिए 1906 नंबर है।
LPG ई-केवाईसी अपडेट एक नजर में
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| संदेश में दी गई तारीख | 16 अगस्त 2026 |
| किनके लिए | जिनका आधार बायोमेट्रिक सत्यापन लंबित है |
| संभावित असर | घरेलू दर या सब्सिडी की पात्रता प्रभावित हो सकती है |
| क्या सप्लाई पूरी तरह बंद होगी? | स्पष्ट नया केंद्रीय आदेश उपलब्ध नहीं |
| घर बैठे प्रक्रिया | OMC App और Aadhaar FaceRD App |
| ऑफलाइन प्रक्रिया | गैस एजेंसी या अधिकृत डिलीवरी कर्मचारी |
| शुल्क | कोई शुल्क नहीं |
| सामान्य हेल्पलाइन | 1800-233-3555 |
| LPG आपातकालीन नंबर | 1906 |