भोपाल: मध्यप्रदेश में वन क्षेत्र और हरियाली में कमी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि प्रदेश में देश में सबसे तेजी से वन क्षेत्र कम होना गंभीर चिंता का विषय है। कमलनाथ ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे के बीच जंगलों की कमी को पर्यावरण और मानव जीवन के लिए खतरनाक बताया।
कमलनाथ के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में मध्यप्रदेश में 612 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र कम हुआ है। इसी अवधि में 148 वर्ग किलोमीटर जंगल को गैर-वन कार्यों के लिए आवंटित किए जाने की बात भी उन्होंने कही है। इसके अलावा जंगलों के बाहर की सीमा में आने वाली 344 वर्ग किलोमीटर हरियाली में भी कमी का दावा किया गया है।
3 साल में 612 वर्ग किमी जंगल कम होने का दावा
पूर्व सीएम कमलनाथ ने अपने पोस्ट में कहा कि बीते तीन वर्षों के दौरान मध्यप्रदेश में 612 वर्ग किलोमीटर जंगल कम हुए हैं। उन्होंने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए प्रदेश के वन क्षेत्र को बचाने की जरूरत पर जोर दिया।उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन आज मानव जीवन के सामने बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे समय में वन क्षेत्र का तेजी से कम होना पर्यावरणीय दृष्टि से चिंता बढ़ाने वाला विषय है।
148 वर्ग किमी जंगल गैर-वन कार्यों के लिए आवंटित
कमलनाथ ने अपने बयान में यह भी कहा कि इसी अवधि में 148 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र गैर-वन कार्यों के लिए आवंटित किया गया।उन्होंने जंगलों के बाहर मौजूद हरियाली में भी कमी का मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक, जंगल के बाहर की सीमा में 344 वर्ग किलोमीटर हरियाली कम हुई है।
जंगलों को बताया मध्यप्रदेश की जीवनरेखा
पूर्व मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश के जंगलों को प्रदेश की जीवनरेखा बताते हुए इनके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि प्रदेश के पर्यटन का आधार भी वन क्षेत्र है। मध्यप्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ के रूप में मिली पहचान भी जंगलों और वन्यजीवों से जुड़ी है। ऐसे में वन क्षेत्र में कमी का असर पर्यावरण के साथ-साथ पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण पर भी पड़ सकता है।
कमलनाथ की सरकार से जंगल बचाने की अपील
कमलनाथ ने मध्यप्रदेश सरकार से प्रदेश के जंगलों और हरियाली को बचाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र का संरक्षण केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है।उन्होंने सरकार से वन क्षेत्र में हो रही कमी पर गंभीरता से ध्यान देने और जंगलों व हरियाली के संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की।