भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के आह्वान पर मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इसी दिशा में राज्य सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 को पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू कर दिया है।
सभी विभागों और ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होंगे नए नियम
मुख्यमंत्री ने बताया कि नए नियम केवल नगरीय निकायों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राज्य के सभी शासकीय विभागों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी समान रूप से लागू किए गए हैं। अब शहरों और गांवों से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से एकीकृत प्रबंधन किया जाएगा।
चार श्रेणियों में अलग करें कचरा
डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे खुले में कचरा फेंकने या जलाने से बचें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक अपने घर से निकलने वाले कचरे को गीला, सूखा, सैनिटरी और स्पेशल केयर जैसी चार श्रेणियों में अलग-अलग करके ही अधिकृत कचरा संग्रहण वाहन को सौंपें।
होम कम्पोस्टिंग और RRR केंद्रों को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने जैविक कचरे से घर पर खाद बनाने (होम कम्पोस्टिंग) को बढ़ावा देने की बात कही। साथ ही पुराने कपड़े, किताबें और अन्य उपयोगी वस्तुओं को फेंकने के बजाय स्थानीय RRR (Reduce, Reuse, Recycle) केंद्रों पर जमा करने की अपील की। उन्होंने लोगों से बाजार जाते समय कपड़े का थैला और अपनी पानी की बोतल साथ रखने की भी सलाह दी, ताकि सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग कम हो सके।
नगरीय निकायों को दिए नियमित कचरा संग्रहण के निर्देश
मुख्यमंत्री ने सभी नगरीय निकायों को निर्देश दिए कि हर घर, दुकान और झुग्गी बस्तियों से नियमित और समयबद्ध तरीके से कचरे का संग्रहण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
‘मेरा कचरा, मेरी जिम्मेदारी’ का दिया संदेश
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने प्रदेशवासियों से "मेरा कचरा, मेरी जिम्मेदारी" का संकल्प लेने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के सफल क्रियान्वयन में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया, ताकि मध्यप्रदेश को देश का सबसे स्वच्छ और सतत विकास वाला राज्य बनाया जा सके।