भोपाल! मध्य प्रदेश का नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग भी गजब है, यहां अफसरों से ज्यादा कंसल्टेंट काम कर रहे हैं। विभाग में करीब 1000 स्टेट कैडर अधिकारियों के मुकाबले 1100 से अधिक सलाहकार तैनात हैं। इन्हें विभिन्न योजनाओं के संचालन और तकनीकी सलाह के लिए हर महीने लगभग 8 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा रहा है। विभाग का कहना है कि योजनाओं की संख्या अधिक होने के कारण विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है।
अफसरों से ज्यादा कंसल्टेंट
प्रदेश में अमृत 2.0, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), स्वच्छ भारत मिशन, स्मार्ट सिटी, नमामि गंगे और एशियाई विकास बैंक समेत कई परियोजनाओं में बड़ी संख्या में कंसल्टेंट नियुक्त हैं। दिसंबर 2025 तक विभाग में 1383 कंसल्टेंट थे, जिनकी संख्या घटाकर 1139 की गई है। विभाग का दावा है कि पिछले एक साल में करीब 300 सलाहकारों की सेवाएं समाप्त की गई हैं।
अमृत 2.0 में सबसे ज्यादा खर्च
अमृत 2.0 योजना के तहत अकेले 918 कंसल्टेंट तैनात हैं। विभिन्न निजी कंपनियों के इन सलाहकारों पर हर महीने करीब 5.92 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इनका अनुबंध वर्ष 2028 तक है, जिसके चलते हर साल लगभग 72 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाएगा।
पीएम आवास योजना में साढ़े आठ साल तक एक ही फर्म
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए एक निजी कंसल्टेंसी फर्म के 218 सलाहकार मार्च 2017 से दिसंबर 2025 तक काम करते रहे। इस अवधि में कंपनी को हर महीने करीब 1.27 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।
अन्य योजनाओं में भी निजी सलाहकार
स्वच्छ भारत मिशन, फायर सेल, स्मार्ट सिटी, नमामि गंगे, सिंहस्थ, जर्मन बैंक KfW और एशियाई विकास बैंक की परियोजनाओं में भी निजी कंसल्टेंट सेवाएं दे रहे हैं। इन योजनाओं में अलग-अलग कंपनियों के सैकड़ों सलाहकार तकनीकी और परियोजना प्रबंधन का काम संभाल रहे हैं।
विभाग का पक्ष
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे का कहना है कि प्रदेश में 413 नगरीय निकाय हैं और कई बड़ी योजनाएं एक साथ संचालित हो रही हैं। ऐसे में तकनीकी विशेषज्ञों और कंसल्टेंट की जरूरत पड़ती है। उन्होंने बताया कि जिन सलाहकारों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं था, उन्हें हटाया गया है और भविष्य में भी समीक्षा जारी रहेगी।