मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में स्वैच्छिक तबादलों के लिए लागू नई शर्तों को लेकर उठे विवाद के बीच शिक्षकों को राहत मिली है। विभाग ने पति या पत्नी के कार्यस्थल के निकट स्थानांतरण की मांग करने वाले शिक्षकों के लिए विवाह पंजीयन प्रमाणपत्र अनिवार्य किया था, लेकिन अब इस नियम में ढील दे दी गई है।
वहीं दिव्यांग शिक्षकों से एक वर्ष के भीतर जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र मांगे जाने के कारण भी कई शिक्षक परेशान रहे। विवाह पंजीयन प्रमाणपत्र की अनिवार्यता पहली बार लागू किए जाने से बड़ी संख्या में शिक्षक आवेदन नहीं कर पा रहे थे।
पुरानी शादियों वाले शिक्षक हुए प्रभावित
शिक्षक संगठनों का कहना है कि अधिकांश शिक्षकों का विवाह 15 से 20 वर्ष पहले हुआ था, जब विवाह पंजीयन की व्यवस्था व्यापक रूप से प्रचलित नहीं थी। ऐसे में अचानक विवाह पंजीयन प्रमाणपत्र अनिवार्य किए जाने से हजारों शिक्षकों के सामने आवेदन करने में मुश्किलें खड़ी हो गईं। कई शिक्षक अंतिम तिथि तक प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया में जुटे रहे।
देर रात जारी हुआ राहत भरा आदेश
विवाद बढ़ने के बाद लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने मंगलवार देर रात आदेश जारी कर शिक्षकों को राहत प्रदान की। नए निर्देशों के अनुसार, विवाह संबंधी प्रमाण के रूप में मैरिज सर्टिफिकेट के स्थान पर समग्र आईडी कार्ड, सेवा पुस्तिका का सत्यापित पृष्ठ या अन्य कोई उपयुक्त दस्तावेज अपलोड किए जा सकेंगे।
दिव्यांग प्रमाणपत्र को लेकर बनी रही परेशानी
हालांकि, एक वर्ष के भीतर जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र की अनिवार्यता को लेकर दिव्यांग शिक्षक अब भी परेशान रहे। कई शिक्षकों के पास शासन के नियमों के तहत निर्धारित अवधि तक वैध प्रमाणपत्र उपलब्ध हैं, लेकिन नए निर्देशों के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
20 जून से शुरू हुई थी आवेदन प्रक्रिया
गौरतलब है कि स्कूल शिक्षा विभाग में स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए आवेदन प्रक्रिया 20 जून से शुरू हुई थी और मंगलवार इसकी अंतिम तिथि थी। विभाग की ओर से 28 से 30 जून के बीच स्थानांतरण आदेश जारी किए जाएंगे।