बुरहानपुर जिले के केला उत्पादक किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। बुरहानपुर के प्रसिद्ध केले को GI टैग मिल गया है। इससे अब बुरहानपुर का केला देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी अलग पहचान बनाएगा और किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगा।
देशभर में मशहूर है बुरहानपुर का केला
बुरहानपुर का केला अपने स्वाद, आकर्षक रंग और बेहतर गुणवत्ता के कारण देशभर में खास पहचान रखता है। GI टैग मिलने के बाद इसकी विशिष्ट पहचान और मजबूत होगी। GI टैग इस बात का प्रमाण होता है कि किसी उत्पाद की विशेष गुणवत्ता और उसकी पहचान उसके भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती है।
अब बनेगा बुरहानपुर का केला एक खास ब्रांड
GI टैग मिलने के बाद बुरहानपुर के केले को एक अलग और विशिष्ट ब्रांड के रूप में पहचान मिलेगी। इससे बाजार में इसकी विश्वसनीयता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग में भी इजाफा होने की संभावना है।
GI टैग मिलने से होंगे कई फायदे
GI टैग मिलने के बाद यह प्रमाणित हो जाएगा कि बुरहानपुर का केला उसी क्षेत्र का मूल और प्रमाणिक उत्पाद है। ऐसे उत्पादों की मांग अधिक रहती है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकता है। साथ ही नकली उत्पादों पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
विदेशी बाजार में बढ़ेगी मांग
अंतरराष्ट्रीय बाजार में GI टैग गुणवत्ता और विशिष्टता का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में बुरहानपुर के केले के निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी और विदेशी बाजारों में इसकी पहुंच मजबूत होगी। GI टैग किसी उत्पाद की भौगोलिक पहचान को सुरक्षित रखने का भी काम करता है।
1960 से हो रही है बुरहानपुर में केले की खेती
बुरहानपुर में वर्ष 1960 से बड़े पैमाने पर केले की खेती की जा रही है। यह जिले के किसानों की प्रमुख फसल है और इसे 'एक जिला एक उत्पाद' योजना में भी शामिल किया गया है। यहां की अनुकूल जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और विशेष भौगोलिक परिस्थितियां केले को बेहतर स्वाद, रंग और गुणवत्ता प्रदान करती हैं।
18 हजार से अधिक किसान जुड़े हैं केले की खेती से
जिले में करीब 18 हजार 640 किसान केले की खेती से जुड़े हुए हैं। लगभग 26 हजार 120 हेक्टेयर क्षेत्र में केले की खेती की जाती है और यहां सालाना करीब 18 लाख 28 हजार 400 मीट्रिक टन केले का उत्पादन होता है।