विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने मंगोलिया दौरे के दौरान डोर्नोगोवी प्रांत के अल्तानशिरी में निर्माणाधीन मंगोल रिफाइनरी परियोजना का दौरा किया। इस दौरान मंगोलिया की विदेश मंत्री Battsetseg Batmunkh और उद्योग एवं खनन मंत्री Gongor Damdinyam भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना स्थल पर चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।
भारतीय और मंगोलियाई कर्मियों से की बातचीत
डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने परियोजना स्थल पर कार्यरत भारतीय और मंगोलियाई कर्मचारियों से भी मुलाकात की। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों की टीमों के समर्पण और मेहनत की सराहना की।
रणनीतिक साझेदारी को बताया मजबूत आधार
मंगोलिया की विदेश मंत्री के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और Mongolia के संबंध गहरे सभ्यतागत, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्य, विकास की आकांक्षाएं और मजबूत जनसंपर्क रिश्तों को और मजबूत बनाते हैं।
70 साल पुराने राजनयिक संबंधों का जिक्र
जयशंकर ने कहा कि पिछले वर्ष भारत और मंगोलिया ने अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया था। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुए समझौतों और निर्णयों की प्रगति की समीक्षा करना भी था।
1.7 अरब डॉलर की भारत समर्थित परियोजना
मंगोलिया में बन रही तेल रिफाइनरी परियोजना भारत सरकार की सबसे बड़ी वैश्विक सॉफ्ट लाइन ऑफ क्रेडिट (LOC) पहलों में से एक है। इस परियोजना के लिए भारत ने 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई है। परियोजना को भारत-मंगोलिया सहयोग और रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जा रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को मिलेगी नई मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि रिफाइनरी परियोजना पूरी होने के बाद मंगोलिया की ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और दोनों देशों के आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों को नई दिशा मिलेगी। यह परियोजना भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ और क्षेत्रीय सहयोग नीति के तहत भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।