लखनऊ- राजधानी लखनऊ में कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब पूरे प्रदेश में कोचिंग संस्थानों का व्यापक सर्वे और सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर बिना पंजीकरण संचालित कोचिंग सेंटरों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
सभी जिलों में शुरू होगा विशेष सर्वे अभियान
उच्च शिक्षा विभाग की विशेष सचिव निधि श्रीवास्तव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित कोचिंग संस्थानों का विस्तृत सर्वे कराया जाए। इस दौरान यह जांच होगी कि कौन-कौन से संस्थान उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकृत हैं और कौन बिना अनुमति के संचालित हो रहे हैं।
अवैध कोचिंग सेंटरों पर होगी कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण चल रहे कोचिंग संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे संस्थानों का रिकॉर्ड तैयार कर उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे और आवश्यक होने पर संचालन भी बंद कराया जा सकता है।
सिर्फ पंजीकरण नहीं, सुरक्षा मानकों की भी होगी जांच
प्रदेश सरकार ने कहा है कि केवल पंजीकरण होने से संस्थानों को राहत नहीं मिलेगी। भवन की मजबूती, अग्निशमन उपकरण, विद्युत सुरक्षा, आपातकालीन निकास, वेंटिलेशन और साफ-सफाई जैसी व्यवस्थाओं की भी जांच की जाएगी। किसी भी तरह की लापरवाही मिलने पर कार्रवाई होगी।
विद्यार्थियों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को सुरक्षित और बेहतर माहौल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
प्रदेश में सिर्फ 3152 कोचिंग संस्थान हैं पंजीकृत
विभागीय आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में फिलहाल केवल 3152 कोचिंग संस्थान ही पंजीकृत हैं, जबकि अनुमान है कि इससे कई गुना अधिक संस्थान बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। कई जगह छोटे कमरों में क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को बैठाकर कोचिंग चलाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
नियमों का पालन नहीं करने वालों पर बढ़ेगी सख्ती
उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम, 2002 के तहत बिना वैध प्रमाणपत्र के कोचिंग संचालन अवैध है। इसके अलावा अग्निशमन विभाग से NOC लेना भी अनिवार्य है। सरकार अब इन नियमों के पालन की जमीनी स्तर पर समीक्षा करेगी।