कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी नेतृत्व को चुनौती देने वाले नेताओं के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने बड़ा कदम उठाते हुए आठ वरिष्ठ नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इस कार्रवाई ने बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
फिरहाद हकीम और अरूप बिस्वास समेत कई बड़े नाम शामिल
निष्कासित नेताओं में राज्य की राजनीति के कई चर्चित चेहरे शामिल हैं। इनमें फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, जावेद अहमद खान, अरूप रॉय, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा, सबीना यास्मीन और स्नेहाशीष चक्रवर्ती के नाम प्रमुख हैं। पार्टी का आरोप है कि इन नेताओं ने संगठन के खिलाफ गतिविधियों में हिस्सा लिया और अनुशासनहीनता दिखाई।
कारण बताओ नोटिस के बाद हुई कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने पहले संबंधित नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। जवाब से असंतुष्ट होने के बाद संगठन ने कठोर रुख अपनाते हुए निष्कासन का फैसला लिया। टीएमसी का कहना है कि पार्टी के संविधान और अनुशासन को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नए नेतृत्व ढांचे को लेकर बढ़ा विवाद
बीते दिनों पार्टी के एक असंतुष्ट गुट ने संगठन में बड़े बदलावों की घोषणा की थी। इस गुट ने नया नेतृत्व ढांचा तैयार करते हुए वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को पार्टी का नया चेयरपर्सन घोषित करने का दावा किया। इसके साथ ही कई अन्य नेताओं को भी महत्वपूर्ण पद सौंपे गए थे, जिससे विवाद और गहरा गया।
तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी संघर्ष तेज
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल संगठनात्मक कार्रवाई नहीं बल्कि पार्टी के भीतर चल रही शक्ति संघर्ष की तस्वीर भी पेश करता है। विधानसभा चुनावों के बाद से पार्टी में असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं, लेकिन अब मामला सार्वजनिक टकराव तक पहुंच गया है।
बंगाल की राजनीति पर पड़ सकता है असर
आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पार्टी के भीतर मतभेद लंबे समय तक बने रहते हैं तो इसका असर संगठन की रणनीति और आगामी चुनावी तैयारियों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस इस संकट से कैसे निपटती है।