प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय जनसंघ के संस्थापक और प्रखर राष्ट्रवादी नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए त्याग, राष्ट्रसेवा और समर्पण के महत्व को रेखांकित किया।
पीएम मोदी ने किया भावपूर्ण नमन
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में लिखा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने निःस्वार्थ भाव से राष्ट्र और समाज की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी के प्रखर विचार, आदर्श और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी एक महान देशभक्त, विद्वान और दूरदर्शी राजनेता थे, जिन्होंने भारत के विकास और राष्ट्रीय एकता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
संस्कृत सुभाषित के जरिए दिया त्याग का संदेश
प्रधानमंत्री ने अपने पोस्ट में संस्कृत का प्रसिद्ध श्लोक भी साझा किया—
"न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः।
परेण नाकं निहितं गुहायां विभ्राजते यद्यतयो विशन्ति॥"
इस श्लोक का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि अमरत्व केवल कर्म, धन या वंश से नहीं, बल्कि त्याग और उच्च आदर्शों के प्रति पूर्ण समर्पण से प्राप्त होता है। जो लोग राष्ट्र, समाज और सत्य के लिए अपने स्वार्थों का त्याग करते हैं, वे जनमानस में सदैव अमर बने रहते हैं।
डॉ. मुखर्जी के योगदान को किया याद
प्रधानमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में डॉ. मुखर्जी का साहस, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रीय हित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका बलिदान भारत की सामूहिक स्मृति में हमेशा अंकित रहेगा और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में मार्गदर्शन करता रहेगा।
योग दिवस पर भी साझा किया था संस्कृत संदेश
गौरतलब है कि एक दिन पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर भी प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत सुभाषित साझा किया था। उन्होंने कहा था कि योग आज दुनिया भर में करोड़ों लोगों को न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ बना रहा है, बल्कि उन्हें सकारात्मक और आत्मविश्वासपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा भी दे रहा है।