प्रधानमंत्री के उत्तराखंड निवासियों के लिए 9 आग्रह:
1. स्थानीय भाषाओं का संरक्षण: पीएम मोदी ने उत्तराखंड के लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी आने वाली पीढ़ियों को गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी जैसी भाषाएँ सिखाएं, ताकि ये बोलियां और संस्कृतियां जीवित रहें और राज्य की पहचान को मजबूती मिले।
2. पर्यावरण संरक्षण: पीएम मोदी ने "एक पेड़ मां के नाम" आंदोलन को आगे बढ़ाने का आग्रह किया, जिससे हर व्यक्ति एक पेड़ अपनी माँ के नाम पर लगाए। इससे जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में मदद मिलेगी।
3. नदी-नौलों का संरक्षण: प्रधानमंत्री मोदी ने पारंपरिक जल स्रोतों और नदियों के संरक्षण पर बल दिया, ताकि इनका पानी साफ रहे और भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपलब्ध हो।
4. गाँवों से जुड़े रहें: उन्होंने उत्तराखंड के लोगों से आग्रह किया कि वे अपने गाँव और जड़ों से जुड़े रहें और विशेष रूप से सेवानिवृत्ति के बाद गाँव लौटने पर विचार करें।
5. पुराने घरों में होम स्टे की व्यवस्था: पीएम मोदी ने अपने गाँव के पुराने घरों को छोड़ने के बजाय होम स्टे का निर्माण करें ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ मिले और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हों।
पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए प्रधानमंत्री के 4 आग्रह:
6. स्वच्छता का ध्यान रखें: उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में यात्रा के दौरान स्वच्छता बनाए रखें और कचरा इधर-उधर न फैलाएं।
7. स्थानीय उत्पादों का समर्थन करें: "वोकल फॉर लोकल" के सिद्धांत का पालन करें और अपनी यात्रा का कम से कम 5% हिस्सा स्थानीय उत्पादों पर खर्च करें, जिससे स्थानीय लोगों की आय बढ़े।
8. यातायात नियमों का पालन: पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतें और ट्रैफिक नियमों का पालन करें।
9. स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान करें: धार्मिक स्थलों पर जाने से पहले वहाँ के रीति-रिवाज और नियमों की जानकारी लें और उनका सम्मान करें।
आगे अपने बयान में पीएम मोदी ने यह भी कहा कि, पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में तेजी से विकास हुआ है। केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के पुनर्निर्माण के साथ-साथ मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत पौराणिक मंदिर क्षेत्रों का विकास भी किया जा रहा है। इसके साथ ही पीएम ने राज्य के लोगों को विकास के साथ सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया और प्रवासी उत्तराखंडियों के राज्य के विकास में योगदान को भी सराहा।
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