RSS प्रमुख मोहन भागवत ने एक पुस्तक के विमोचन में कहा कि, भारत ने दुनिया को हमेशा ही रास्ता दिखाया है। भारत ने विश्व को बताया है कि, अलग-अलग विचारों के बीच एकता के साथ आगे बढ़ा जा सकता है। इसके साथ ही RSS चीफ ने आगे कहा कि, भारत ने दुनिया को विविधता में एकता नहीं, विविधता ही एकता का मंत्र दिया है।
हमने वसुधैव कुटंबकम के मंत्र से विश्व को एक रहने का आधार दिया
मोहन भागवत ने अपने इस संबोधन में आगे कहा कि, भारत सदियों तक समुद्र और पहाड़ की सीमाओं के कारण सुरक्षित रहा। सुरक्षा के कारण अतीत में समृद्धि आई और इसी सुरक्षा और समृद्धि की भावना से उपजी स्थिरता की भावना ने नए विचार को जन्म दिया। उन्होंने आगे कहा कि, हमने वसुधैव कुटंबकम के मंत्र से विश्व को एक रहने का आधार दिया। यह सिर्फ एक विचार नहीं है। एक फैक्ट है जिसका हमने अनुभव किया है।
भारत के अस्तित्व का यही एकमात्र मकसद है
RSS प्रमुख भागवत ने इस दौरान यह भी कहा कि, आज के समय में साथ आना तो आसान है, लेकिन साथ रहना मुश्किल है। जो लोग मिलेंगे नहीं, वो कभी झगड़ा भी नहीं करेंगे। लेकिन, लोगों को एक-दूसरे से नहीं लड़ना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि, हमें देश को ऐसा बनाना चाहिए कि, हम देश को सिखा सकें कि, हम एक हैं। भारत के अस्तित्व का यही एकमात्र मकसद है।
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