महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के लिए सभी पार्टियां चुनावी प्रचार जोर-शोर से कर रही हैं। पार्टियां लोगों से लुभावने वादे करने के साथ-साथ चुनाव प्रचार के लिए अलग-अलग तरीके भी अपना रही हैं। इसी के साथ तमाम नेताओं के बीच जुबानी तीर छोड़े जा रहे हैं। इसी क्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन पर निशाना साधा।
अमित शाह ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने व्यंग्य करते हुए कहा कि, सोनिया जी याद रखिए, "राहुल बाबा" का राजनीतिक "विमान" जो पहले ही 20 बार "क्रैश" हो चुका है, इस बार महाराष्ट्र में 21वीं बार फिर से "दुर्घटनाग्रस्त" होने वाला है। उन्होंने राहुल गांधी के बार-बार चुनावी असफलताओं का जिक्र करते हुए कहा कि, सोनिया गांधी ने कई बार राहुल को उतारने की कोशिश की, लेकिन हर बार विफल रहे, और इस चुनाव में भी उनका हश्र वैसा ही होगा।
महा विकास अघाड़ी गठबंधन को "औरंगजेब फैन क्लब"
बीजेपी नेता अमित शाह ने महा विकास अघाड़ी गठबंधन को "औरंगजेब फैन क्लब" कहकर उन पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा कि, भारतीय जनता पार्टी और महायुति शिवाजी महाराज के आदर्शों पर चलती हैं, जबकि अघाड़ी गठबंधन सिर्फ सांप्रदायिक तुष्टिकरण में लगा हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि, पूर्व अघाड़ी सरकार ने मराठवाड़ा वाटर ग्रिड परियोजना, जिसमें 4,000 करोड़ रुपये की लागत थी, को रोक दिया, जिससे मराठवाड़ा क्षेत्र में पानी की कमी बनी रही।
23 नवंबर को महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार बन रही
अमित शाह ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि, देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने इस योजना को शुरू किया था, लेकिन उद्धव ठाकरे की सरकार ने इसे रोक दिया। केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने जनता को भरोसा दिलाते हुए आगे अपने संबोधन में कहा कि, 23 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक बार फिर महायुति सरकार सत्ता में आएगी, जो हर खेत तक पानी पहुंचाने का काम करेगी।
वक्फ बोर्ड ने मंदिरों और किसानों की जमीन हड़पी
इसके अलावा, बीजेपी के सीनियर नेता अमित शाह ने वक्फ बोर्ड के कानून में संशोधन की बात की। केंद्रीय गृहमंत्री ने आरोप लगाया है कि, वक्फ बोर्ड ने कई गांवों की जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया है, जिसमें मंदिरों और किसानों की जमीन भी शामिल है। इस संबंध में सरकार ने एक विधेयक लाने का प्रयास किया था, लेकिन राहुल गांधी, शरद पवार और उद्धव ठाकरे ने इसका विरोध किया।
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