दशहरा के पहले राज्य सरकार ने सरकारी कर्मियों को बड़ा तोहफा दिया है। शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में कुल आठ एजेंडों पर मुहर लगी है। सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन पर आरक्षण का मामला विचाराधीन होने के बावजूद राज्य सरकार ने सरकारी सेवकों को प्रमोशन देने का निर्णय लिया है। इसकी जानकारी देते हुए कैबिनेट सचिव एस सिद्धार्थ ने बताया कि लगभग सभी विभागों में लंबे समय से कर्मचारी और पदाधिकारी का प्रमोशन रुका हुआ था।
उदाहरण के तौर पर कई जूनियर इंजीनियर कार्यपालक अभियंता के पद पर प्रभार के रूप काम कर रहे हैं। इसी तरह कई जूनियर कर्मचारी को सीनियर का प्रभार देकर काम करवाया जा रहा है और उन्हें वेतनमान जूनियर का ही दिया जा रहा है। अब इस पर राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि किसी एक पद के लिए 100% में 16% अनुसूचित जाति और एक प्रतिशत अनुसूचित जनजाति यानी 17% को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आलोक में उसे स्थिर किया जाएगा और बाकी 83% में भी 16% अनुसूचित जाति एवं 1% अनुसूचित जनजाति यानी 17% अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को आरक्षण दिया जाएगा। इसके बाद देखकर सामान्य प्रमोशन देने का निर्णय लिया गया है।
कैबिनेट सचिव एस सिद्धार्थ ने बताया कि जिस विभाग में जिस पद पर 17% अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति नहीं रहेंगे उतने पद को फिलहाल रिक्त कर छोड़ दिया जाएगा। उसका निर्णय आगे राज्य सरकार लेगी। राज्य के सरकारी कर्मचारियों एवं पदाधिकारी का प्रमोशन 2016 से रुका हुआ है जिसको देखते हुए आज कैबिनेट में वैकल्पिक रास्ता तैयार किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट का जो निर्णय आएगा उस निर्णय के आलोक में काम किया जाएगा। अगर जिन्हें प्रमोशन मिला है अगर कोर्ट के निर्देश में वह प्रमोशन नहीं करने वाला होगा तो जिस पद पर वह कर्मचारी था उसे उसी पद पर लाया जाएगा, लेकिन जो उन्हें प्रमोशन देकर पेमेंट किया जाएगा वह राज्य सरकार वापस नहीं लेगी।
दशहरा के पहले राज्य सरकार ने सरकारी कर्मियों को बड़ा तोहफा दिया है। शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में कुल आठ एजेंडों पर मुहर लगी है। सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन पर आरक्षण का मामला विचाराधीन होने के बावजूद राज्य सरकार ने सरकारी सेवकों को प्रमोशन देने का निर्णय लिया है। इसकी जानकारी देते हुए कैबिनेट सचिव एस सिद्धार्थ ने बताया कि लगभग सभी विभागों में लंबे समय से कर्मचारी और पदाधिकारी का प्रमोशन रुका हुआ था।
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