राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल पर बहस जारी है। कई पार्टी के नेता अपने-अपने विचार और तर्क रख रहे हैं। वहीं सदन में बहस के दौरान हल्की-फुल्की नोंकझोंक और शब्दबाणों से एक -दूसरे पर वार-प्रहार भी देखने को मिल रहे हैं। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अपने भाषण के दौरान बहुत बार विपक्ष पर हमला बोला, तो वहीं कांग्रेस के नेताओं ने नड्डा के बयान के बीच शोर-शराबा किया।
राहुल गांधी पर जेपी नड्डा ने साधा निशाना
अपने भाषण के दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन इशारों-इशारों में घेरते हुए कहा कि, मैं ऐसे लोगों का ज्ञान वर्धन करना चाहता हूं। काका कालेलकर की रिपोर्ट नेहरू जी के समय आई थी, वो कहां पड़ी हुई थी। मंडल कमीशन, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय आया, लेकिन कहां पड़ा हुआ था, क्या हुआ उसका, क्या कर पाए। उन्होंने आगे कहा कि, सन 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, आप सर्विसेज में ओबीसी को रिजर्वेशन दीजिए। 1995-96 में ओबीसी और एससी-एसटी कैटगरी सर्विसेज में जुड़ीं। जेपी नड्डा ने कांग्रेस से पूछा कि, आज सेक्रेटरी के पैनल का कटऑफ ईयर है, वो है 1992। मतलब जो सेक्रेटरी हैं, वो 1992 बैच के नीचे के लोग हैं। अब मैं पूछना चाहता हूं कि 2004 से 2014 तक कितने सेक्रेटरी ओबीसी से थे, वो कहां थे और किस क्राइटेरिया में थे।
लीडर को लीडर बनना पड़ेगा, ट्यूटर से नहीं चल पाता है
कांग्रेस समेत कई दल महिला आरक्षण बिल में ओबीसी वर्ग को शामिल किए जाने पर अड़े हैं। इसको लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ओबीसी सेक्रेटरी के बारे में बात करते हुए मोदी सरकार को घेरा था। वहीं बिना नाम लिए राहुल गांधी पर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि, मैं बार-बार बोलता हूं कि, लीडर को लीडर बनना पड़ेगा, ट्यूटर से नहीं चल पाता है। ट्यूटर स्टेटमेंट से काम नहीं चलता है। वो भी ट्यूटर अगर कोई लीडर हो तो भी समझ में आता है। उन्होंने कहा कि, ये NGO को लेकर आ जाते हैं, जिन्हें न अता-न पता है और किसी की जानकारी नहीं।
Comments (0)