जातिवाद को लेकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि, हमें 1947 में आजादी मिली थी। आजादी के इतने साल हो गए। लेकिन आज भी जात-पात इस कदर होता है कि, इसे रोकने के लिए एक संत को मैदान में उतरना पड़ रहा है। भारत आजाद हुआ गुलामी से लेकिन जातिवाद की गुलामी से आज भी आजादी नहीं मिली। जातिवाद की गुलामी ने इस देश को तोड़ कर रख दिया। उन्होंने आगे अपने बयान में कहा कि, इस देश की गति को रोक दिया। हमारे देश के विकास को रोक कर रख दिया। इसकी वजह से देश में हो रहे नवाचार पर भी रोक लग गई है। बाबा ने आगे कहा कि, इस देश में जातीवाद को लेकर वैनमस्यता पैदा कर दी गई।
जात-पात के नाम पर देश को कैंसर लग गया
पं. धीरेंद्र शास्त्री ने आगे अपने बयान में कहा कि, हिंदू-मुसलमान, अगला-पिछला, ऊंच-नीच जैसे भेदभाव की लंबी-लंबी दीवारें खड़ी कर दी गईं। जात-पात के नाम पर देश को कैंसर का रोग लग गया इसलिए किसी न किसी को घर से बाहर निकल पड़ेगा। बाबा बागेश्वर ने यहां आगे कहा कि, हम बांग्लादेश के हिंदुओं की हालत देखकर चिंतिंत रहते हैं। हमें इस बात की फिक्र रहती है कि, कहीं हमारे देश में यह नौबत ना आ जाए। इसलिए भारत के हिंदुओं की पीढ़ियां सुरक्षित करने के लिए हम सड़कों पर उतरे हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि, सम्मान के साथ शांति और कानून व्यवस्था के सभी नियमों का पालन करते हुए, हम बहुत ही सहजता के साथ अपनी यात्रा को आगे ले जा रहे हैं।
यात्रा से एक नई क्रांति तो खड़ी हो रही है
उन्होंने कहा कि, गांव-गांव, शहर से जो लोग चलकर बाहर आ रहे हैं। उससे एक नई क्रांति तो खड़ी हो रही है। लोगों में पहली बार हिंदुत्व के प्रति जागरूकता देखने को मिला है। लोग पहली बार घर से बाहर निकाल कर सड़कों पर उतरे हुए हैं। बाबा ने आगे कहा है कि, लोगों का यह हुजूम देखना अद्भुत तो है पर अभी भी लोग उतने नहीं आ रहे, जीतने आने चाहिए। भारत 100 करोड़ हिंदुओं का देश है, कम से कम एक करोड़ लोगों को तो इसके लिए सड़कों पर उतरना होगा। उन्होंने आगे कहा कि, हिंदू बचेगा तभी तो हिंदुओं में और जागृति आएगी। एक को देखकर दूसरे जागते हैं और उन्हें जगाना बहुत जरूरी है। बिछड़े-पिछड़े लोगों को गले लगाना बहुत जरूरी है।
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