तीन बार के भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता को सोमवार को आठवीं दिल्ली विधानसभा के प्रथम सत्र में अध्यक्ष चुना गया। गुप्ता का विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठना उनके लिए एक चक्र के पूरे होने का प्रतीक है, जिन्हें आम आदमी पार्टी के 10 साल के कार्यकाल के दौरान कई बार मार्शल द्वारा विधानसभा से बाहर निकाला गया था। प्रोटेम स्पीकर अरविंदर सिंह लवली द्वारा कराए गये चुनाव के बाद मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष आतिशी विधानसभा अध्यक्ष को उनकी कुर्सी तक लेकर गयीं।
गुप्ता के कार्यभार संभालने के कुछ ही मिनट बाद सदन में हंगामा होने लगा। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से नारेबाजी शुरू हो गई। हंगामे के बीच गुप्ता ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी। इस बीच ‘आप’ ने भाजपा पर ‘दलित विरोधी’ और ‘सिख विरोधी’ होने का आरोप लगाया। पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने सदन में कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिल्ली विधानसभा का नेतृत्व एक ऐसी पार्टी कर रही है जो दलित और सिख विरोधी है। भाजपा ने मुख्यमंत्री कार्यालय से बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर और शहीद भगत सिंह की तस्वीरें हटा दी हैं।’ आतिशी ने बाद में संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री कार्यालय की तस्वीर दिखाते हुए आरोप दोहराये। पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी इस मुद्दे पर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोला।
हालांकि, सत्तारूढ़ भाजपा ने ‘आप’ के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कल पेश होने वाली कैग रिपोर्ट से ध्यान हटाने के लिए आम आदमी पार्टी जानबूझकर ऐसा कर रही है। कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और महात्मा गांधी की तस्वीरों के साथ बाबासाहेब अंबेडकर और भगत सिंह के चित्र अभी भी लगे हुए हैं।
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