कुंभ नगरी में स्नान के लिए पहुंचे 48,500 लोग अपने परिजनों से बिछुड़े। खास बात यह कि परिजनों से बिछुड़ने वालों में महिलाओं के मुकाबले पुरुषों की संख्या अधिक रही यह सभी कुछ दिनों के इंतजार के बाद अपने परिजनों तक पहुंच गए। मेले में सिर्फ छह साल का एक बच्चा ही ऐसा रहा, जो अब तक परिजनों तक नहीं पहुंच सका।
कुंभ नगरी में परिजनों से बिछुड़ने वालों की मदद के लिए तीन केंद्र काम कर रहे थे। इनमें एक सरकार की ओर से बना डिजिटल भूला-बिसरा केंद्र रहा जबकि दोस्वयंसेवी संगठनों ने संचालित किया। इनमें सबसे पुराना भारत सेवा केंद्र एवं हेमवती नंदन बहुगुणा स्मृति समिति शामिल रहीं। भूले भटकों के लिए सबसे अधिक मददगार भारत सेवा केंद्र एवं हेमवती नंदन बहुगुणा समिति रहा।
किसी की पत्नी खोई, तो किसी का बेटा
आखिरी स्नान पर्व के दौरान भी भूले भटके केंद्र में अपनों से बिछुड़ जाने वालों की भीड़ रही। 24 परगना, बंगाल से आए संजय महापात्रा पत्नी खो गई। संजय ने कुछ देर तो उनको संगम घाट पर तलाशा लेकिन, वह नहीं मिलीं। रोते-बिलखते संजय नंगे बदन ही भारत सेवा केंद्र पहुंचे। आंखों में आंसू भरकर संजय शिविर संचालकों से गुहार लगाने रहे। कई घंटे तक वहां शिविर के बाहर ही खड़े रहे।
अलीगढ़ से आईं चंदा का नौ साल का बेटा विशाल भी संगम में स्नान के बाद घाट पर ही गुम हो गया। इकलौता बेटा के लापता होते ही चंदा बदहवास हो उठीं। काफी देर तक वह उसे संगम के आसपास तलाशती रहीं। किसी तरह भटकती हुईं वह भारत सेवा केंद्र पहुंची।
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