भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में पीएम ने कहा कि, 100 साल पहले जिस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का बीज बोया गया था, वह आज एक वट वृक्ष के रूप में भारत की महान संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहा है। उन्होंने साथ ही कहा कि, यह उनका सौभाग्य है कि उनके जैसे लाखों लोगों को RSS ने देश के लिए जीने की प्रेरणा दी है।
RSS वट वृक्ष के रूप में अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आगे कहा कि, RSS के कारण ही उन्हें मराठी भाषा और मराठी परंपरा से जुड़ने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ है। पीएम ने कहा कि, यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के 350 वर्ष पूरे हुए हैं, जब अहिल्याबाई होल्कर की जयंती का 300वां वर्ष है और कुछ ही समय पहले बाबा साहेब आंबेडकर के प्रयासों से बने देश के संविधान ने भी अपने 75 वर्ष पूरे किए हैं।
लाखों लोगों को RSS ने देश के लिए जीने की प्रेरणा दी
देश के मुखिया ने आगे कहा कि, वेद से विवेकानंद तक भारत की महान परंपरा और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक संस्कार यज्ञ RSS पिछले 100 वर्षों से चला रहा है। पीएम ने आगे कहा कि, मेरा सौभाग्य है कि मेरे जैसे लाखों लोगों को RSS ने देश के लिए जीने की प्रेरणा दी है। संघ के ही कारण मुझे मराठी भाषा और मराठी परंपरा से जुड़ने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
विजयादशमी के दिन RSS की स्थापना की थी
भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में पीएम ने कहा कि, डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने युवाओं के एक चुनिंदा समूह के साथ वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन RSS की स्थापना की थी। हेडगेवार का जन्म नागपुर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। इसका मुख्यालय नागपुर में ही है। RSS को BJP का वैचारिक संरक्षक माना जाता है।
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