RSS के प्रमुख, डॉ. मोहन भागवत ने एक बौद्धिक कार्यक्रम के दौरान हिंदू समाज में एकता और समाज परिवर्तन के लिए पांच महत्वपूर्ण बदलावों पर जोर दिया। डॉ. भागवत ने समाज में सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया ने कहा कि, हम सभी हिंदुओं को एक मानते हैं, लेकिन समाज में जाति, पंथ, और भाषा के आधार पर भेदभाव देखा जाता है। हमें इस भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में प्रयास करना होगा।
हिंदू समाज के लिए एकता का मार्ग
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया ने यह भी बताया कि, हमारे मित्रों और कुटुंब के सदस्यों से हमारे संबंध जैसे होते हैं, वैसे ही अन्य समाज के लोगों से भी होने चाहिए। डॉ. मोहन भागवत ने हिंदू समाज में विभिन्न जातियों, क्षेत्रों, और भाषाओं के बीच मित्रता और सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने समाज में भारतीय परिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देने की भी बात की। मोहन ने कहा कि, परिवारों में भारतीय परंपराओं को सहेजने से समाज की दिशा सही दिशा में बढ़ेगी।
पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी अपनाना
मोहन भागवत ने पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जल संरक्षण, पॉलिथीन के प्रयोग में कमी और वृक्षारोपण को प्राथमिकता देने की बात की। RSS के प्रमुख ने कहा कि, हर भारतीय परिवार को अपनी भाषा, वस्त्र, भोजन, आवास और यात्रा में स्वदेशी को अपनाना चाहिए, ताकि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को मजबूत किया जा सके।
मातृभाषा का उपयोग बढ़ाने की अपील
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने विदेशी भाषाओं के बजाय अपनी मातृभाषा में संवाद करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मोहन भागवत ने कहा कि मातृभाषा का प्रयोग करने से न केवल समाज की एकता बढ़ेगी, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर भी जीवित रहेगी।
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