ये रोबोटिक म्यूल्स आर्मी की ताकत को और भी बढ़ा रहे हैं। ऊंचाई वाले कठिन इलाकों में ये काफी मददगार हैं। इन्हें ‘रोबोटिक म्यूल्स’ यानी Multi-Utility Legged Equipment भी कहा जाता है। परेड में इन रोबोटिक म्यूल्स की मौजूदगी भारत की सैन्य क्षमताओं और आधुनिक तकनीकी प्रगति को प्रदर्शित करती है।
हर मौसम में काम आएगा रोबोटिक म्यूल
रोबोटिक म्यूल यानी रोबोटिक खच्चर को किसी भी मौसम में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह न केवल वजन ढो सकता है, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुश्मन पर गोलियों की बौछार भी कर सकता है। भारतीय सेना ने आपातकालीन खरीद (ईपी) के चौथे चरण (सितंबर 2022 से सितंबर 2023) के तहत 100 रोबोटिक खच्चर खरीदे थे और उनकी फॉरवर्ड एरिया में तैनाती की है। पड़ोसी चीन का मुकाबला करने के लिए पूर्वी लद्दाख में सेना कई तरह के कार्यों के लिए विशेष रूप से हाई एल्टीट्यूड इलाकों के लिए टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स की तलाश कर रही है। आर्मी की इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रख कर स्वदेशी रोबोटिक म्यूल को बनाया गया है।क्या है खासियत रोबोटिक म्यूल की
ये किसी भी मौसम में काम कर सकते हैं।
ये -40 से +55 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में काम कर सकते हैं।
ये 15 किलोग्राम का वजन उठा सकते हैं।
ये सीढ़ियां, खड़ी पहाड़ियां, और अन्य बाधाओं को आसानी से पार कर सकते हैं।
ये पानी के अंदर जा सकते हैं और नदी-नालों को भी पार कर सकते हैं।
इनमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स, इंफ़्रारेड जैसी चीज़ों को पहचानने की क्षमता होती है।
इनमें दुश्मन की लोकेशन का पता लगाने के लिए 360 डिग्री कैमरे होते हैं।
इनमें थर्मल कैमरे और अन्य सेंसर लगे होते हैं।
इनका इस्तेमाल सीमा पर तैनात जवानों तक छोटे-मोटे सामान ले जाने के लिए भी किया जा सकता है।
भारतीय सेना ने आपातकालीन खरीद (ईपी) के चौथे चरण (सितंबर 2022 से सितंबर 2023) के तहत 100 रोबोटिक खच्चर खरीदे हैं। इनकी तैनाती अग्रिम क्षेत्रों में की गई है।
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