नई दिल्ली. बिजली मंत्रालय ने सोमवार को संसद में बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर 2031-32 तक अतिरिक्त 26.3 गीगावाट लोड बढ़ाएंगे। यह अतिरिक्त लोड ग्रिड में एकीकृत किया जाएगा और मुख्य रूप से नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता से पूरा किया जाएगा। यह नया अनुमान मार्च में सरकार के पहले अनुमान से लगभग दोगुना है जब डेटा सेंटर से बिजली मांग 13.56 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया था। बढ़ती मांग बिजली क्षेत्र के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रही है।
नए अनुमान का आधार
वर्तमान अनुमान विभिन्न राज्यों से डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए प्राप्त परियोजनाओं पर आधारित है। मंत्रालय राज्य ट्रांसमिशन यूटिलिटीज, वितरण कंपनियों और डेटा सेंटर डेवलपर्स जैसे हितधारकों के साथ परामर्श कर रहा है। विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, ट्रांसमिशन की आवश्यकता और ग्रिड बैलेंसिंग को लेकर चर्चा चल रही है। डेटा सेंटर से बिजली लोड बहुत स्पाइकी यानी अचानक उतार-चढ़ाव वाला हो सकता है। इसलिए ग्रिड की स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण चुनौती है।
नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भरता
मंत्रालय ने कहा कि यह अतिरिक्त लोड मुख्य रूप से नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता से पूरा किया जाएगा। सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों को बढ़ावा देकर मांग को पूरा करने की योजना है। हालांकि नवीकरणीय ऊर्जा की प्रकृति रुक-रुक कर बिजली पैदा करने वाली होती है इसलिए स्टोरेज और बैकअप व्यवस्था मजबूत करनी होगी। डेटा सेंटर की निरंतर बिजली जरूरत को ध्यान में रखते हुए मिश्रित ऊर्जा स्रोतों पर जोर दिया जा रहा है। दीर्घकालिक योजना में इसे शामिल किया गया है।
ग्रिड स्थिरता को लेकर चिंताएं
डेटा सेंटर का बिजली लोड बहुत स्पाइकी हो सकता है जिससे ग्रिड पर अचानक दबाव बढ़ सकता है। ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क को मजबूत बनाने की जरूरत है। राज्य स्तर की यूटिलिटीज के साथ समन्वय बढ़ाया जा रहा है। विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी उपायों पर चर्चा हो रही है। यदि उचित तैयारी नहीं हुई तो ग्रिड में अस्थिरता की समस्या पैदा हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते बुनियादी ढांचे का विस्तार जरूरी है।
हितधारकों के साथ परामर्श
बिजली मंत्रालय राज्य ट्रांसमिशन यूटिलिटीज, वितरण कंपनियों और डेटा सेंटर डेवलपर्स के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। विश्वसनीय बिजली आपूर्ति और ट्रांसमिशन आवश्यकताओं को लेकर सुझाव जुटाए जा रहे हैं। ग्रिड बैलेंसिंग के लिए आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है। विभिन्न राज्यों में प्रस्तावित परियोजनाओं के आधार पर अनुमान को अपडेट किया गया है। सभी पक्षों के सहयोग से ही इस चुनौती का समाधान संभव है।
भविष्य की तैयारियां और चुनौतियां
AI और डेटा सेंटर की बढ़ती मांग को देखते हुए बिजली क्षेत्र को बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत है। नवीकरणीय ऊर्जा के साथ-साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम विकसित करने होंगे। सरकार इस दिशा में नीतिगत उपाय कर रही है। 2031-32 तक 26.3 गीगावाट अतिरिक्त लोड को संभालने के लिए दीर्घकालिक योजना बनानी होगी। ग्रिड स्थिरता बनाए रखते हुए डिजिटल अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करना अब प्राथमिकता बन गया है।