नई दिल्ली:केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में साफ शब्दों में कहा कि जो लोग संविधान और व्यवस्था को नकारकर हथियार उठाते हैं, उन्हें इसकी कीमत चुकानी ही होगी। उन्होंने दो टूक कहा कि लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है और कानून के खिलाफ जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह बयान सरकार के सख्त और स्पष्ट रुख को दिखाता है। गृह मंत्री ने नक्सलवाद को लेकर एक अहम बात कही कि इसकी जड़ गरीबी या विकास की कमी नहीं, बल्कि एक विचारधारा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश के कई गरीब इलाकों में नक्सलवाद नहीं फैला, जबकि कुछ विशेष क्षेत्रों में यह वैचारिक रूप से पनपा।
आदिवासियों को भटकाने का आरोप
अमित शाह ने आरोप लगाया कि वामपंथी विचारधारा ने भोले-भाले आदिवासियों को गुमराह किया और उन्हें मुख्यधारा से दूर रखा। उन्होंने कहा कि शिक्षा, बैंक और स्वास्थ्य सुविधाओं को नुकसान पहुंचाकर विकास को रोका गया, जिससे आदिवासी क्षेत्र लंबे समय तक पिछड़े रहे।
कांग्रेस पर साधा निशाना
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद आदिवासी इलाकों तक बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंचाई गईं। उन्होंने विपक्ष से पूछा कि अब जब विकास हो रहा है तो सवाल उठाने से पहले अपने कार्यकाल का हिसाब दें।
बस्तर में बदलाव का शाह का दावा
गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर जैसे इलाकों में अब नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है और वहां विकास की नई तस्वीर दिख रही है। गांव-गांव में स्कूल, राशन दुकान और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं, जिससे लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है।
आंकड़ों से पेश की नक्सलवाद की तस्वीर
अमित शाह ने अपने भाषण में आंकड़ों के जरिए बताया कि देश में नक्सलवाद पर तेजी से नियंत्रण पाया गया है। उन्होंने कहा कि 2014 में जहां 126 जिले नक्सल प्रभावित थे, अब यह संख्या घटकर सिर्फ 2 रह गई है। पहले 35 जिले सबसे ज्यादा प्रभावित माने जाते थे, जो अब शून्य हो चुके हैं। नक्सली घटनाओं वाले पुलिस स्टेशनों की संख्या 350 से घटकर मात्र 7 रह गई है। पिछले तीन सालों में 706 नक्सली मारे गए, 2218 गिरफ्तार हुए और 4839 ने सरेंडर किया। साथ ही 11 वर्षों में 596 नए पुलिस स्टेशन बनाए गए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत हुई है। उन्होनें दोहराया कि सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक देश को पूरी तरह नक्सल-मुक्त बनाना है। उन्होंने भरोसा जताया कि तय समयसीमा के भीतर यह लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा और देश को इस समस्या से स्थायी राहत मिलेगी।
शहीदों से तुलना पर कड़ा विरोध
शाह ने नक्सलियों की तुलना भगत सिंह और बिरसा मुंडा जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों से करने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह शहीदों का अपमान है, क्योंकि वे देश की आजादी के लिए लड़े थे, जबकि नक्सली निर्दोषों की हत्या करते हैं। गृह मंत्री के पूरे भाषण से यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। सख्ती, विकास और पुनर्वास की रणनीति के जरिए अब इस समस्या के अंत की ओर बढ़ने का दावा किया जा रहा है।