जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी पर सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आज जीवित होतीं तो वह बीजेपी जैसी पार्टी पर प्रतिबंध लगा देतीं। गहलोत के इस बयान के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है और इसे हिंदुओं तथा हिंदुत्व के खिलाफ मानसिकता का परिचायक बताया है।
अशोक गहलोत के बयान से बढ़ा राजनीतिक तापमान
जयपुर में आयोजित एक सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि देश का मौजूदा माहौल बेहद चिंताजनक है। उन्होंने दावा किया कि अपने 50 वर्षों के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने ऐसा वातावरण पहले कभी नहीं देखा। गहलोत ने कहा कि देश में धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण की राजनीति की जा रही है और समाज को बांटने की कोशिश हो रही है। इसी दौरान उन्होंने कहा कि यदि इंदिरा गांधी जैसी मजबूत नेता आज जीवित होतीं तो वह बीजेपी जैसी पार्टी पर प्रतिबंध लगाने का साहसिक फैसला ले सकती थीं।
'देश नहीं जागा तो भुगतने होंगे परिणाम'
अपने संबोधन में गहलोत ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरे की घंटी हैं। उन्होंने कहा कि अगर देश के लोग समय रहते नहीं जागे तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। गहलोत ने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग राजनीतिक लाभ के लिए समाज को धार्मिक आधार पर विभाजित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी वर्गों को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए।
मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट न देने पर BJP से पूछा सवाल
अशोक गहलोत ने बीजेपी की चुनावी रणनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में बीजेपी ने मुस्लिम समुदाय को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं दिया। गहलोत ने कहा कि अगर पार्टी वास्तव में सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की बात करती है तो उसे चुनावों में मुस्लिम उम्मीदवारों को भी अवसर देना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी खुद को केवल हिंदुत्ववादी पार्टी के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है और यही उसकी राजनीति का मुख्य आधार बन गया है।
बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा पलटवार
गहलोत के बयान के बाद बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस लगातार हिंदुओं और हिंदुत्व को निशाना बनाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी हिंदुत्व को जीवन जीने की एक शैली बता चुका है, ऐसे में उस विचारधारा से जुड़े लोगों या दलों पर प्रतिबंध लगाने की बात करना कांग्रेस की सोच को दर्शाता है। बीजेपी ने गहलोत के बयान को पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
'कांग्रेस की मानसिकता आपातकाल जैसी'
शहजाद पूनावाला ने कहा कि अशोक गहलोत का बयान कांग्रेस की उसी मानसिकता को उजागर करता है, जिसने देश में आपातकाल लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज भी विरोधी विचारधारा को दबाने की सोच रखती है। पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस नेताओं के बयान लगातार यह साबित करते हैं कि पार्टी तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है और एक विशेष वर्ग को खुश करने के लिए इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं।
बयान को लेकर तेज हुई राजनीतिक बहस
अशोक गहलोत के इस बयान के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए ऐसे बयान राजनीतिक माहौल को और गर्मा सकते हैं। एक ओर कांग्रेस बीजेपी पर ध्रुवीकरण की राजनीति का आरोप लगा रही है, वहीं बीजेपी कांग्रेस पर तुष्टिकरण और हिंदू विरोधी राजनीति करने का आरोप लगा रही है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है।