असम - असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में तैनात महिला वन रक्षकों के साहस और समर्पण की सराहना की है। उन्होंने इन महिलाओं को ‘वन दुर्गा’ बताते हुए कहा कि वे राज्य की समृद्ध वन्यजीव विरासत और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा कर रही हैं। शारदीय नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी का स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री ने महिलाओं की भूमिका को प्रकृति संरक्षण से जोड़ा।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा पोस्ट में मां कात्यायनी को पवित्रता की रक्षक बताते हुए कहा कि असम के जंगलों में भी ऐसी महिलाएं हैं, जो पूरी निष्ठा से वन्यजीवों की सुरक्षा में जुटी हैं।
108 महिलाओं का पहला जत्था 2023 में हुआ था शामिल
हिमंता बिस्वा सरमा के पोस्ट के मुताबिक, अगस्त 2023 में 108 महिलाओं का पहला जत्था काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में फ्रंटलाइन फॉरेस्ट गार्ड के रूप में शामिल हुआ था। इन्हें ‘वन दुर्गा’ नाम दिया गया। इनमें किसान परिवारों की बेटियां भी शामिल हैं, जिन्हें डेरगांव स्थित 11वीं असम पुलिस बटालियन में प्रशिक्षण दिया गया। इन महिला वन रक्षकों की जिम्मेदारी जंगल और उसमें रहने वाले वन्यजीवों की सुरक्षा करना है। उनकी तैनाती से वन संरक्षण के कार्यों में महिलाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा मिला है।
पैदल, वाहनों और नावों से करती हैं गश्त
मुख्यमंत्री के अनुसार, काजीरंगा की महिला वन रक्षक अलग-अलग परिस्थितियों में गश्त करती हैं। वे वाहनों और पैदल जंगल के इलाकों में निगरानी रखती हैं। बाढ़ के दौरान जरूरत पड़ने पर नावों के जरिए भी गश्त की जाती है।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एक सींग वाले गैंडे के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां हाथी, बाघ और जंगली भैंस सहित कई वन्यजीव भी पाए जाते हैं। इनकी सुरक्षा के लिए वन रक्षकों को जंगल के चुनौतीपूर्ण हालात में काम करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला वन रक्षकों का साहस और समर्पण प्राकृतिक विरासत को बचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
पीएम मोदी भी कर चुके हैं महिला वन रक्षकों की सराहना
हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काजीरंगा यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने उद्यान के दौरे के दौरान महिला वन रक्षकों से मुलाकात की थी और उनके साहस को प्रेरणादायक बताया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी यह दिखाती है कि प्राकृतिक धरोहर की रक्षा में वे अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं। उनके मुताबिक, जब बेटियां जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा करती हैं, तो वे असम की पहचान को भी सुरक्षित रखने में योगदान देती हैं।
मां कात्यायनी से वन दुर्गाओं की सुरक्षा की प्रार्थना
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने महिला वन रक्षकों के लिए शक्ति और सुरक्षा की कामना की। उन्होंने प्रार्थना की कि मां कात्यायनी सभी ‘वन दुर्गाओं’ को साहस दें और जंगल में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय उनकी रक्षा करें।
काजीरंगा की ये महिला वन रक्षक वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ महिलाओं की नेतृत्व क्षमता और सार्वजनिक सेवा में उनकी भागीदारी का भी उदाहरण पेश करती हैं। मुख्यमंत्री के संदेश ने उनके योगदान को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।