नई दिल्ली - भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को लेकर बातचीत तेज होती दिखाई दे रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इसका सफल निष्पादन वैश्विक व्यापार और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के हित में होगा।
बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के इतर अटलांटिक काउंसिल के साथ बातचीत के दौरान सीतारमण ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता अंतिम चरण की ओर बढ़ती नजर आ रही है। उन्होंने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के हालिया बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने समझौते पर जल्द हस्ताक्षर होने की उम्मीद जताई थी।
पीयूष गोयल ने कानूनी मसौदे की दी थी जानकारी
वित्त मंत्री की टिप्पणी से एक दिन पहले पीयूष गोयल ने बताया था कि भारत-अमेरिका बीटीए के पहले चरण को अंतिम रूप दिया जा चुका है और फिलहाल उसका कानूनी मसौदा तैयार किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि समझौते को लागू करने से पहले भारत के प्रतिस्पर्धात्मक हितों को ध्यान में रखा जाएगा।
गोयल के मुताबिक, भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसे समान स्तर की प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले पर्याप्त प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिले। ऐसे में समझौते की शर्तें और उनके आर्थिक प्रभाव दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
अमेरिकी राजदूत ने भी दिए सकारात्मक संकेत
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। गुरुवार को नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में बोलते हुए उन्होंने कहा था कि समझौते का व्यापक ढांचा तैयार हो चुका है और दोनों देश इसे अंतिम रूप देने के करीब हैं।
हालांकि, समझौते पर हस्ताक्षर और इसके लागू होने की तारीख को लेकर अंतिम आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। वार्ता के अंतिम चरण में पहुंचने के संकेतों के बावजूद इसकी वास्तविक समयसीमा और शर्तें दोनों देशों के फैसलों पर निर्भर करेंगी।
भारत की आर्थिक वृद्धि पर वित्त मंत्री का भरोसा
बातचीत के दौरान निर्मला सीतारमण ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई चुनौतियों के बावजूद भारत अपनी विकास दर बनाए रखने में सफल रहा है। उनके अनुसार, कोविड महामारी के बाद पिछले चार-पांच वर्षों में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा है।
वित्त मंत्री ने इस प्रदर्शन का श्रेय समावेशी विकास नीतियों, कौशल विकास में निवेश और वित्तीय अनुशासन को दिया। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर अपनी जिम्मेदारी समझती है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की सहायता करते समय भी अनियंत्रित खर्च से बचना जरूरी है।
बुनियादी ढांचे पर खर्च को बताया अहम
सीतारमण ने पूंजीगत व्यय पर सरकार के जोर को भी आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनके अनुसार, सार्वजनिक निवेश से सड़क, परिवहन और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति मिलती है। इससे निर्माण गतिविधियों, रोजगार और संबंधित क्षेत्रों में मांग बढ़ने के जरिए अर्थव्यवस्था पर व्यापक गुणक प्रभाव पड़ सकता है।
अब भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर दोनों पक्षों की आगे की बातचीत और आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रहेगी। यदि समझौता तय शर्तों के साथ अंतिम रूप लेता है, तो इसका असर द्विपक्षीय व्यापार, बाजार तक पहुंच और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ समझौते की अंतिम शर्तों और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।