वृंदावन. इस साल 25 अक्टूबर 2026 रविवार को शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में इस दिन का विशेष महत्व है। भगवान श्रीकृष्ण गर्भ गृह से निकलकर जगमोहन में चांदी के सिंहासन पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। सफेद पोशाक मोर मुकुट और सोलह श्रृंगार से सजे बांके बिहारी की यह छवि साल में सिर्फ एक बार ही देखने को मिलती है। देशभर से श्रद्धालु इस दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का माहौल चरम पर रहता है। भक्तों की लंबी कतारें सुबह से ही लग जाती हैं।
महारास मुद्रा में सजे प्रभु का स्वरूप
शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना के निकट वंशीवट में गोपियों के साथ महारास किया था। इसी दिव्य लीला की स्मृति में बांके बिहारी मंदिर में ठाकुर जी का विशेष श्रृंगार किया जाता है। ठाकुर जी को बंसी धारण कराई जाती है और उन्हें महारास की मुद्रा में सजाया जाता है। सफेद वस्त्र आभूषण और मोर मुकुट से सजे प्रभु का स्वरूप भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देता है। यह छवि प्रेम और दिव्यता का प्रतीक मानी जाती है। दर्शन के दौरान भक्त हर हर महादेव और राधे राधे के नारे लगाते हैं। मंदिर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।
साल में एक बार का दुर्लभ श्रृंगार
बांके बिहारी के इस विशेष स्वरूप के दर्शन साल में केवल शरद पूर्णिमा पर ही होते हैं। पूरे वर्ष भक्त इसी एक दिन का इंतजार करते हैं। सफेद पोशाक और बंसी के साथ महारास मुद्रा में विराजमान प्रभु की छवि अद्वितीय होती है। इस दिन मंदिर में विशेष आरती और भजन कीर्तन का आयोजन होता है। श्रद्धालु दूर-दूर से आकर इस दुर्लभ दर्शन का लाभ उठाते हैं। कई भक्त रात भर जागरण करते हैं। मंदिर प्रबंधन भी इस दिन विशेष व्यवस्था करता है ताकि सभी भक्तों को दर्शन का अवसर मिल सके।
निधिवन से जुड़ी दिव्य मान्यताएं
बांके बिहारी मंदिर के निकट स्थित निधिवन को ठाकुर जी का प्राकट्य स्थल माना जाता है। कहा जाता है कि स्वामी हरिदास जी की साधना और संगीत से प्रसन्न होकर बिहारी जी निधिवन में प्रकट हुए थे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी और गोपियों के साथ निधिवन में ही दिव्य रासलीला की थी। निधिवन से जुड़ी मान्यता है कि रात के समय यहां भगवान की दिव्य लीलाएं होती हैं। इसी वजह से शाम के बाद परिसर खाली करा दिया जाता है। भक्त दिन में ही दर्शन करके लौटते हैं।
भक्तों की उमड़ती भीड़ और इंतजार
शरद पूर्णिमा पर बांके बिहारी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु इस विशेष दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कई लोग रात भर जागकर सुबह के दर्शन का इंतजार करते हैं। मंदिर के आसपास की गलियां भक्तों से पट जाती हैं। सुरक्षा और व्यवस्था के लिए प्रशासन विशेष तैयारी करता है। भक्तों में उत्साह और श्रद्धा का अद्भुत माहौल देखने को मिलता है। कई परिवार साल भर इसी दिन की तैयारी करते हैं। दर्शन के बाद भक्त प्रसाद लेकर लौटते हैं।
मंदिर में विशेष व्यवस्था और श्रद्धा का माहौल
मंदिर प्रबंधन शरद पूर्णिमा के लिए पहले से ही तैयारियां शुरू कर देता है। ठाकुर जी के श्रृंगार की विशेष व्यवस्था की जाती है। चांदी के सिंहासन पर विराजमान प्रभु के दर्शन के लिए कतारें व्यवस्थित रखी जाती हैं। भजन मंडली और कीर्तन का आयोजन होता है। भक्तों को सुविधा देने के लिए पानी और अन्य व्यवस्थाएं बढ़ाई जाती हैं। पूरे परिसर में भक्ति का वातावरण छाया रहता है। यह दिन वृंदावन के लिए सबसे पावन और महत्वपूर्ण अवसरों में से एक माना जाता है। श्रद्धालु इस दिव्य अनुभव को जीवन भर याद रखते हैं।