कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग के एक महत्वपूर्ण आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने 48 घंटे तक बाइक और स्कूटी के इस्तेमाल पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाते हुए कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के नाम पर आम नागरिकों की आवाजाही पूरी तरह नहीं रोकी जा सकती।
आम लोगों को मिली बड़ी राहत
चुनाव आयोग ने 20 अप्रैल को अधिसूचना जारी कर मतदान से 48 घंटे पहले दोपहिया वाहनों के उपयोग और पिलियन राइडिंग (पीछे बैठने) पर रोक लगा दी थी। इस फैसले को लेकर जनता और विभिन्न पक्षों ने सवाल उठाए थे। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद आम लोगों को बड़ी राहत मिली है।
कोर्ट ने क्या कहा
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा राव ने स्पष्ट कहा कि चुनाव आयोग के पास चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से कराने के अधिकार जरूर हैं, लेकिन उन अधिकारों का प्रयोग कानून की सीमा में होना चाहिए। अदालत ने माना कि पहले से ही बड़ी संख्या में केंद्रीय बल और पुलिस बल तैनात हैं, ऐसे में सभी नागरिकों पर व्यापक प्रतिबंध उचित नहीं है।
पिलियन राइडिंग पर आंशिक रोक
हाईकोर्ट ने चुनाव के दिन यानी 29 अप्रैल को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक पिलियन राइडिंग पर 12 घंटे की पाबंदी बरकरार रखी है। हालांकि परिवार के सदस्य मतदान, मेडिकल इमरजेंसी या पारिवारिक जरूरी काम के लिए पीछे बैठ सकेंगे।
बाइक रैलियों पर जारी रहेगी रोक
अदालत ने साफ किया कि चुनाव से पहले 48 घंटे तक बाइक रैलियों पर लगाया गया प्रतिबंध जारी रहेगा। कोर्ट ने माना कि इससे चुनावी हिंसा की संभावना कम हो सकती है, इसलिए इस फैसले में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
चुनाव आयोग के आदेश में पहले भी हुआ था संशोधन
भारी आलोचना के बाद चुनाव आयोग ने पहले ही अपने आदेश में बदलाव करते हुए ओला, उबर, जोमैटो और स्विगी जैसी सेवाओं को छूट दी थी। साथ ही पहचान पत्र के साथ ऑफिस जाने वाले लोगों को भी राहत दी गई थी।
चुनावी माहौल में बड़ा संदेश
हाईकोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा के नाम पर आम नागरिकों की स्वतंत्रता पर अत्यधिक रोक नहीं लगाई जा सकती। इस आदेश से चुनाव आयोग के अधिकारों और उनकी सीमाओं को लेकर भी स्पष्ट संदेश गया है।