नई दिल्ली: संसद के उच्च सदन राज्यसभा में बुधवार को 'केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी के सांसद शमिक भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर 'पश्चिम बंग' (Paschim Banga) करने की मांग उठाई। केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने वाले विधेयक का स्वागत करते हुए बीजेपी सांसद ने कहा कि राज्य का नाम केवल एक पहचान नहीं है, बल्कि यह उसके इतिहास और 1947 में इसके गठन की परिस्थितियों से गहराई से जुड़ा हुआ है।
"बंगाल नाम रखना इतिहास का अपमान होगा"
चर्चा में भाग लेते हुए शमिक भट्टाचार्य ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा राज्य का नाम बदलकर 'बंगाल' करने की कोशिशों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केवल विधानसभा में बहुमत होने के कारण ऐसा प्रयास किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि 20 जून 1947 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल का जन्म हुआ था और बंगाली हिंदुओं की रक्षा के लिए अलग राज्य की मांग की गई थी। भट्टाचार्य ने तर्क दिया कि 'पश्चिम बंगाल' से 'पश्चिम' शब्द हटाकर केवल 'बंगाल' करना उन लोगों के बलिदान का अपमान होगा जिन्होंने अलग राज्य के लिए संघर्ष किया था।
'वंदे मातरम' और बंकिम चंद्र चटर्जी के अपमान पर भी घेरा
सदन में अपने संबोधन के दौरान बीजेपी सांसद ने 'वंदे मातरम' का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बंगाल ने 'वंदे मातरम' का जन्म भी देखा है और इसका विरोध भी। सीपीआई के संस्थापक सदस्य मुजफ्फर अहमद की आत्मकथा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अहमद ने बंकिम चंद्र चटर्जी के उपन्यास 'आनंदमठ' और 'वंदे मातरम' को नफरत से भरा हुआ बताया था। शमिक भट्टाचार्य ने इस मानसिकता की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय गीत का इस तरह अपमान अस्वीकार्य है।
पाटलिपुत्र और बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग का समर्थन
पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की मांग के साथ ही शमिक भट्टाचार्य ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के अन्य सहयोगियों द्वारा उठाए गए मुद्दों का भी समर्थन किया। उन्होंने बिहार की राजधानी पटना का नाम बदलकर पौराणिक नाम 'पाटलिपुत्र' करने और नालंदा जिले के बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मांग का भी समर्थन किया।