संदेशखाली/कोलकाता: सुंदरवन के इस रेतीले और नमकीन हवाओं वाले इलाके संदेशखाली में इस बार राजनीति की एक ऐसी लहर उठी, जिसने तृणमूल कांग्रेस के 15 साल पुराने 'नमक लगे' साम्राज्य को तिनके की तरह बिखेर दिया। चुनावी नतीजों ने स्पष्ट कर दिया है कि संदेशखाली की जनता ने शेख शाहजहां के आतंक और उत्पीड़न के खिलाफ निर्णायक जनादेश दिया है। यहाँ भाजपा उम्मीदवार सनत सरदार ने पहली बार 'कमल' खिलाते हुए तृणमूल की झर्ना सरदार को करारी शिकस्त दी है।
आतंक के 'शार्क' पर भारी पड़ा जन-विद्रोह
कभी माकपा का गढ़ रहा संदेशखाली 2016 में तृणमूल के पास गया था, लेकिन शेख शाहजहां के उभार ने यहाँ के लोगों का जीना दूभर कर दिया। स्थानीय दबंगों द्वारा जमीन कब्जाने, खेतों में खारा पानी भरकर भेड़ी (मछली पालन तालाब) बनाने और महिलाओं के यौन उत्पीड़न के आरोपों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। हालांकि टीएमसी ने इस बार मौजूदा विधायक सुकुमार महतो का टिकट काटकर झर्ना सरदार को मैदान में उतारा था, लेकिन जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ।
आंकड़ों में संदेशखाली का जनादेश
वोटों की गिनती के दौरान शुरुआती दौर में तृणमूल आगे थी, लेकिन 8-9 राउंड के बाद भाजपा ने जो बढ़त बनाई, वह जीत में बदल गई:
सनत सरदार (BJP): 1,07,189 वोट
झर्না सरदार (TMC): 89,679 वोट
रवींद्रनाथ महतो (CPIM): 12,921 वोट
जीत का अंतर: 17,510 वोट
रेखा पात्र की भी ऐतिहासिक जीत
संदेशखाली आंदोलन का चेहरा बनीं रेखा पात्र ने भी इतिहास रचा है। भाजपा ने उन्हें पड़ोसी सीट हिंगलगंज से मैदान में उतारा था, जहाँ उन्होंने तृणमूल के आनंद सरकार को लगभग 5,000 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, संदेशखाली से शुरू हुई यह 'परिवर्तन की सुनामी' पूरे बंगाल में फैल गई है। भाजपा 205 सीटों पर आगे रहते हुए पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने की ओर बढ़ रही है, जबकि तृणमूल मात्र 83 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है।