देश में अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन की तैयारी हो रही है। इस बीच कांग्रेस ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा आयोजन से पहले कुछ सवाल उठाए हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने सवाल उठाया है कि क्या राम मंदिर असली मुद्दा है या बेरोजगारी और महंगाई? पित्रोदा का कहना है कि मुझे किसी भी धर्म से कोई समस्या नहीं है। कभी-कभार मंदिर जाना ठीक है, लेकिन आप उसे मुख्य मंच नहीं बना सकते। ऐसे में सवाल उठना तय है कि कांग्रेस राम मंदिर के उद्घाटन से पहले यह मुद्दा क्यों उठा रही है।
मंदिर में अधिक समय दे रहे हैं पीएम
पित्रोदा ने कहा कि अपने धर्म का पालन करें लेकिन धर्म को राजनीति से अलग रखें। पित्रोदा ने कहा कि मैं देख रहा हूं कि आज लोकतंत्र कमजोर हो गया है।' एक देश का पीएम 10 साल तक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करता, ये बात मुझे परेशान करती है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मंदिर में अधिक समय दे रहे हैं, यह मुझे परेशान करता है।' पित्रोदा ने कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के सदस्यों से 2024 लोकसभा के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को 'गंभीरता से' लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अगला चुनाव 'देश की नियति' तय करेगा। पित्रोदा ने यह बात ईवीएम की कार्यप्रणाली पर कुछ विपक्षी दलों की तरफ से ऐतराज के सवाल पर कही। उन्होंने कहा कि मैं अपनी पार्टी और गठबंधन के सदस्यों से इस मामले को बहुत गंभीरता से लेने का अनुरोध करूंगा। उन्होंने कहा कि यह कोई साधारण मसला नहीं है। इसे नज़रअंदाज़ न करें क्योंकि 2024 का चुनाव देश का भाग्य तय करेगा।
विपक्ष से पीएम का चेहरा कौन?
इंडिया ब्लॉक के पीएम चेहरे पर बोलते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव किसी चेहरे या व्यक्तित्व पर नहीं, बल्कि एक विचार पर लड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव एक विचार पर लड़ा जाना चाहिए। संविधान की रक्षा कौन करेगा? आपके लोकतंत्र को कौन बढ़ाएगा? नौकरियां, आपके स्वास्थ्य की देखभाल और बुनियादी ढांचा कौन प्रदान करेगा? यह राष्ट्रपति चुनाव नहीं है। यह एक संसदीय चुनाव है। तो आप एक चेहरा नहीं बल्कि एक विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विचार यह है कि हम लोकतंत्र चाहते हैं
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