नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर चल रही चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार का पक्ष रखा और विपक्ष के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि परिसीमन को लेकर फैलाया जा रहा यह भ्रम गलत है कि किसी राज्य या वर्ग का नुकसान होगा।
‘अखिलेश यादव को डरने की जरूरत नहीं’
चर्चा के दौरान शाह ने विपक्षी नेताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि अखिलेश यादव को इस मुद्दे पर परेशान या चिंतित होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक आयोग की रिपोर्ट और संसद की मंजूरी के बाद ही लागू होगी।
जनगणना और परिसीमन पर सरकार का पक्ष
गृह मंत्री ने कहा कि यह कहना गलत है कि सरकार जातीय जनगणना नहीं कराना चाहती। उन्होंने बताया कि जनगणना प्रक्रिया दो चरणों में होती है—पहले मकानों की गणना और फिर जनसंख्या का विवरण लिया जाता है।
सीटों के बढ़ने का गणित समझाया
अमित शाह ने लोकसभा सीटों के संभावित विस्तार को लेकर कहा कि 543 से बढ़कर सीटों की संख्या 850 तक पहुंचने की बात आंकड़ों के आधार पर समझाई गई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आरक्षण और जनसंख्या अनुपात के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण किया जाएगा, जिससे किसी क्षेत्र की हिस्सेदारी कम नहीं होगी बल्कि संतुलन बनेगा।
दक्षिण भारत की हिस्सेदारी पर स्पष्टीकरण
उन्होंने कहा कि परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी घटने के बजाय बढ़ेगी। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल में सांसदों की संख्या और प्रतिशत दोनों में वृद्धि होगी।
लोकतंत्र पर टिप्पणी
अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत के लोकतंत्र को कोई खत्म नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि लोकतंत्र को कमजोर करने के प्रयास करने वालों को जनता ने ही जवाब दिया है।