पूर्व सीएम कमलनाथ ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार की योजना पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को लेकर अब बहस केवल “कब लागू होगा” तक सीमित नहीं रही, बल्कि “कैसे और किस आधार पर लागू होगा” यह बड़ा सवाल बन गया है। सरकार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वह महिला सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठा रही है, लेकिन जिस तरीके से इसे लागू करने की बात हो रही है, उस पर गंभीर आपत्तियाँ उठ रही हैं।
जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी
सबसे बड़ा मुद्दा 2011 की जनगणना को आधार बनाने का है। एक दशक से ज्यादा पुराना डेटा आज के भारत की वास्तविक जनसंख्या, सामाजिक संरचना और क्षेत्रीय बदलावों को बिल्कुल सही तरीके से नहीं दर्शाता। इतने वर्षों में जनसंख्या का वितरण बदला है, कई क्षेत्रों में वृद्धि हुई है, कई जगहों पर सामाजिक समीकरण बदले हैं। ऐसे में पुराने आंकड़ों के आधार पर आरक्षण तय करना न्याय के मूल सिद्धांत के खिलाफ माना जा सकता है।
अगर सरकार की मंशा वास्तव में निष्पक्ष और न्यायसंगत होती, तो वह पहले वर्तमान जनगणना का कार्य पूरा कराती। देश के हर वर्ग, हर क्षेत्र और हर समुदाय की वास्तविक संख्या सामने लाती और फिर उसी के अनुपात में प्रतिनिधित्व तय करती। यही लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है कि जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी।
लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि आखिर जल्दबाज़ी किस बात की है। जब आरक्षण को 2029 से लागू करने की बात खुद सरकार कर रही है, तो फिर 2011 के पुराने आंकड़ों पर निर्भर रहने की क्या मजबूरी है। क्या यह एक ऐसा ढांचा तैयार करने की कोशिश है, जिसमें वास्तविक प्रतिनिधित्व की बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता दी जा सके।
परिसीमन प्रक्रिया पर जोर
परिसीमन और जनगणना दोनों ही बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं हैं। इन्हें पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ किया जाना चाहिए। अगर इन प्रक्रियाओं में ही संदेह की गुंजाइश रह गई, तो फिर उससे निकला आरक्षण भी विवादों में घिरा रहेगा।
राहुल गांधी का समर्थन किया
मैं राहुल गांधी जी द्वारा उठाए गए सवालों से पूरी तरह सहमत हूँ और इस मुद्दे पर चल रही इस लड़ाई में उनके साथ खड़ा हूँ। यह सिर्फ एक राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों का सवाल है, जिसे किसी भी हालत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
नई जनगणना और निष्पक्ष परिसीमन के बाद लागू करने की मांग
महिलाओं को उनका अधिकार मिलना चाहिए, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन यह अधिकार सही और अद्यतन आंकड़ों के आधार पर मिलना चाहिए, ताकि हर वर्ग की महिलाओं को न्याय मिल सके। सरकार को चाहिए कि पहले वर्तमान जनगणना पूरी कराए, फिर निष्पक्ष परिसीमन करे और उसके बाद महिला आरक्षण लागू करे। तभी यह कदम वास्तव में ऐतिहासिक और न्यायपूर्ण कहा जाएगा, वरना यह केवल एक अधूरा और विवादित प्रयास बनकर रह जाएगा।