नई दिल्ली - केंद्र सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में तीन अहम विधेयक पेश किए, जिनमें महिला आरक्षण संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक 2026 शामिल हैं। इन विधेयकों को लेकर संसद में तीखी बहस और विपक्ष का जोरदार विरोध देखने को मिला।
विपक्ष का हंगामा, सरकार पर आरोप
परिसीमन विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इसे राजनीतिक लाभ के लिए लाया जा रहा है। विपक्ष ने इसका विरोध करते हुए संसद में हंगामा किया और प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
पीएम मोदी का स्पष्ट संदेश
हंगामे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में बयान देते हुए कहा कि परिसीमन प्रक्रिया में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा। पीएम मोदी ने कहा कि, चाहे दक्षिण हो, उत्तर हो, पूरब हो, पश्चिम हो, छोटे राज्य हों या बड़े राज्य हों, यह प्रक्रिया किसी के साथ भी अन्याय या भेदभाव नहीं करेगी। अगर नीयत साफ है तो शब्दों के खेल की जरूरत नहीं है। मैं गारंटी देता हूं।
परिसीमन और प्रस्तावित बदलाव
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके तहत लोकसभा में सांसदों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर लगभग 850 करने का प्रस्ताव है। इनमें लगभग 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित की जाएंगी। यह पुनर्गठन संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन के माध्यम से किया जाएगा। विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनसंख्या निर्धारण के लिए केवल आधिकारिक रूप से प्रकाशित जनगणना के आंकड़ों का उपयोग होगा। फिलहाल 2011 की जनगणना को आधार माना जाएगा।
संसद में चर्चा और वोटिंग का कार्यक्रम
लोकसभा में इन तीनों विधेयकों पर कुल 18 घंटे चर्चा निर्धारित की गई है। 17 अप्रैल को चर्चा के बाद मतदान होगा। इसके बाद राज्यसभा में 18 अप्रैल को विधेयक पेश किए जाएंगे, जहां 10 घंटे चर्चा के बाद उसी दिन वोटिंग कराई जाएगी।