नई दिल्ली: महंगाई भत्ता (डीए) को लेकर चल रहे विवाद में फिलहाल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई टालते हुए अगली तारीख चुनाव के बाद तय की है। अब इस अहम मामले पर 6 मई को सुनवाई होगी, जिससे लाखों राज्य कर्मचारियों की निगाहें अदालत के अगले फैसले पर टिक गई हैं।
सरकार की रिपोर्ट पर कोर्ट की नजर
बुधवार को राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस पी के मिश्रा की बेंच ने रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए कर्मचारियों के पक्ष को जवाबी एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि यदि कर्मचारियों को रिपोर्ट पर कोई आपत्ति है तो वे अपना पक्ष शपथपत्र के माध्यम से रख सकते हैं।
सरकार का दावा: 6000 करोड़ का भुगतान
राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि सरकार पहले ही बकाया डीए के मद में लगभग 6000 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है। उन्होंने बताया कि यह भुगतान पूर्व न्यायाधीश इंदू मल्होत्रा की अगुवाई में गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर किया गया है।
रिकॉर्ड के आधार पर हुआ भुगतान
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन कर्मचारियों का रिकॉर्ड उपलब्ध था, उन्हीं को फिलहाल भुगतान किया गया है। बाकी कर्मचारियों को भी आगामी दिशा-निर्देश मिलने के बाद भुगतान किया जाएगा।
कर्मचारियों की आपत्ति और आरोप
कर्मचारियों की ओर से पेश वकीलों ने कोर्ट में कहा कि उन्हें समिति के सामने अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि सरकार कर्मचारियों के बीच भेदभाव पैदा कर रही है, जिसके चलते अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।
कोर्ट की टिप्पणी और अगला कदम
बेंच ने टिप्पणी की कि डीए भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन पहले दिए गए आदेशों के तहत तय समयसीमा का पालन भी जरूरी है। गौरतलब है कि अदालत ने पहले बकाया डीए का एक हिस्सा तुरंत और शेष भुगतान निर्धारित समय के भीतर करने का निर्देश दिया था।अब सभी पक्षों की दलीलों और जवाबी एफिडेविट के बाद ही अगली सुनवाई में इस विवाद पर आगे की दिशा तय होगी, जो चुनावी माहौल के बीच और भी अहम हो गई है।