महिला आरक्षण कानून में संशोधन को लेकर संसद का तीन दिन का विशेष सत्र गुरुवार से शुरू हो रहा है। इस दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों पर चर्चा की जाएगी।
पीएम ने बताया ऐतिहासिक कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पहल को महिला सशक्तिकरण की दिशा में “ऐतिहासिक कदम” बताया। उन्होंने कहा कि माताओं और बहनों का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है और देश इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
तीन संशोधन विधेयक होंगे पेश
सरकार इस सत्र में तीन संशोधन विधेयक पेश कर सकती है, जिनका उद्देश्य 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करना है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण का प्रावधान है।
लोकसभा सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव
- प्रस्तावित संशोधन के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने की योजना है।
- राज्यों के लिए 815 सीटें
- केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें
जनसंख्या की नई परिभाषा
विधेयक में ‘जनसंख्या’ की परिभाषा में बदलाव का प्रस्ताव है, जिससे संसद यह तय कर सके कि सीटों के निर्धारण के लिए किस जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा।
2011 जनगणना के आधार पर लागू करने की तैयारी
प्रस्ताव है कि महिला आरक्षण को 2027 की जनगणना से अलग रखते हुए 2011 के आंकड़ों के आधार पर लागू किया जाए, ताकि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले इसे प्रभावी बनाया जा सके।
कैबिनेट से मिल चुकी मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल पहले ही इस संशोधन विधेयक को मंजूरी दे चुका है, जिसमें महिला आरक्षण लागू करने और सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रावधान शामिल हैं।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
यदि यह संशोधन पारित होता है, तो यह देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।